छत्तीसगढ़

केशकाल: SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप, कांग्रेस ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

मौजूदा पार्षद का ही नाम काटने पर बवाल

कोण्डागांव। पत्रिका लुक (नरेंद्र सेठिया)
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत नगर पंचायत केशकाल में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। यहां मौजूदा पार्षद के नाम पर ही उनके मतदाता होने को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है। साथ ही समाज विशेष के पात्र मतदाताओं के नाम षड्यंत्रपूर्वक मतदाता सूची से अनुपस्थित दिखाए जाने का आरोप लगा है। इसको लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
बुधवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केशकाल एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। पीसीसी अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष अमीन मेमन ने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर समाज विशेष के मतदाताओं को निशाना बनाकर उनके नाम मतदाता सूची से कटवाने का प्रयास कर रहे हैं, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा हनन है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो कांग्रेस पार्टी एवं समाज के लोग उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
276 मतदाताओं के नाम पर आपत्ति
अमीन मेमन ने बताया कि नगर पंचायत केशकाल में लगभग 276 पात्र मतदाताओं के नामों पर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। इनमें से अधिकांश आपत्तिकर्ता कथित तौर पर भाजपा से जुड़े बताए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्रामपुरी ग्रामीण क्षेत्र सहित बाहरी क्षेत्रों के लोगों द्वारा आपत्तियां लगाई गई हैं, जो संबंधित मतदाताओं को जानते तक नहीं।
कांग्रेस ने मांग की कि फर्जी एवं असत्य आपत्तियां दर्ज कराने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति वास्तव में क्षेत्र का निवासी नहीं है, उसका नाम हटाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन किसी समाज विशेष को निशाना बनाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि जांच में आपत्तियां गलत पाई गईं तो दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
एसडीएम ने कहा
एसडीएम ने कहा कि SIR प्रक्रिया के तहत प्राप्त सभी आपत्तियों पर भारत निर्वाचन आयोग की गाइडलाइंस के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी। किसी भी आपत्ति पर निर्णय लेने से पहले आपत्तिकर्ता को बुलाकर जांच की जाएगी। आपत्तिकर्ता का उसी मतदान केंद्र का मतदाता होना अनिवार्य है। बाहरी व्यक्ति द्वारा आपत्ति किए जाने की स्थिति में वैध दस्तावेज प्रस्तुत करना जरूरी होगा। जांच के दौरान संबंधित मतदाताओं को भी बुलाकर उनका पक्ष सुना जाएगा। प्रशासन पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरा करेगा।

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