Ghansyam Sharma / Sun, Nov 1, 2026 / Post views : 102
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित मातृत्व एवं शिशु चिकित्सा अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस अस्पताल को गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया है, वहां बिजली गुल होने की स्थिति में ऑपरेशन थिएटर (ओटी) तक वैकल्पिक बिजली आपूर्ति नहीं पहुंच पाने का मामला सामने आया है। अस्पताल में जनरेटर उपलब्ध होने के बावजूद उसका लाभ ऑपरेशन थिएटर तक नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए अस्पताल में आपातकालीन बिजली व्यवस्था की यह स्थिति क्यों है?
मामला उस समय सामने आया जब एक गर्भवती महिला के परिजन रविवार सुबह करीब 7:30 बजे महिला को लेकर मातृत्व एवं शिशु चिकित्सा अस्पताल पहुंचे। परिजनों के अनुसार, चिकित्सकीय जांच के दौरान उन्हें बताया गया कि शिशु की धड़कन नहीं चल रही है और शिशु की मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद महिला का ऑपरेशन किया जाना था, लेकिन अस्पताल में बिजली गुल होने के कारण ऑपरेशन नहीं हो पाया।
परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल की ओर से उन्हें बताया गया कि बिजली नहीं होने के कारण ऑपरेशन करना संभव नहीं है और महिला को जगदलपुर ले जाने की सलाह दी गई। उनका कहना है कि वे अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर उम्मीद के साथ जिला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन वहां बिजली की समस्या के चलते ऑपरेशन में देरी का सामना करना पड़ा। परिजनों के मुताबिक, बिजली आने के बाद ही महिला का ऑपरेशन किया गया।
परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि जब अस्पताल में जनरेटर उपलब्ध है, तो बिजली गुल होने पर ऑपरेशन थिएटर में बिजली क्यों नहीं पहुंचती? क्या जनरेटर केवल अस्पताल परिसर में रखने के लिए है या आपातकालीन परिस्थितियों में उसका उपयोग मरीजों के उपचार के लिए भी किया जाना है? यदि जनरेटर होने के बावजूद ऑपरेशन थिएटर में बिजली की आपूर्ति नहीं हो सकती, तो फिर इस व्यवस्था का क्या औचित्य है?
परिजनों का कहना है कि कोण्डागांव जिला मुख्यालय का यह अस्पताल दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है। यहां प्रसव और ऑपरेशन की उम्मीद लेकर महिलाएं पहुंचती हैं। ऐसे में यदि बिजली गुल होने पर ऑपरेशन जैसी जरूरी चिकित्सा प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो मरीजों की परेशानी और जोखिम बढ़ सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि अस्पताल की विद्युत व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जनरेटर से ऑपरेशन थिएटर तक निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
अस्पताल भवन के निर्माण और उसमें उपलब्ध कराई गई सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद यदि बिजली गुल होने पर ऑपरेशन थिएटर में वैकल्पिक बिजली की व्यवस्था काम नहीं करती, तो यह अस्पताल के रखरखाव और तकनीकी प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऑपरेशन थिएटर ऐसी जगह है, जहां बिजली की निर्बाध आपूर्ति बेहद जरूरी होती है। इसके लिए जनरेटर और वैकल्पिक विद्युत व्यवस्था का सही तरीके से काम करना आवश्यक है।
सवाल यह भी है कि क्या जनरेटर की नियमित जांच और रखरखाव किया जाता है? क्या जनरेटर से ऑपरेशन थिएटर तक बिजली पहुंचाने वाली लाइन और ऑटोमैटिक चेंजओवर सिस्टम की नियमित जांच होती है? यदि तकनीकी खराबी पहले से मौजूद थी, तो उसे समय रहते ठीक क्यों नहीं कराया गया? क्या अस्पताल प्रबंधन को इस समस्या की जानकारी थी? इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को देना चाहिए।
इस पूरे मामले में जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कोण्डागांव ने स्वीकार किया कि बिजली गुल होने के कारण महिला का ऑपरेशन तत्काल नहीं हो पाया था। उन्होंने बताया कि अब बिजली आ चुकी है और महिला का ऑपरेशन कर दिया गया है। महिला की स्थिति स्वस्थ है। सीएमएचओ ने स्पष्ट किया कि महिला को अस्पताल लाए जाने के समय ही जांच में शिशु मृत पाया गया था।
सीएमएचओ ने जनरेटर उपलब्ध होने के बावजूद ऑपरेशन थिएटर तक बिजली नहीं पहुंचने के संबंध में कहा कि संभवतः कुछ तकनीकी खराबी के कारण ओटी में जनरेटर से पूरी तरह बिजली की आपूर्ति नहीं हो पा रही है । इसके लिए इंजीनियर को बुलाकर जांच कराई जाएगी और जल्द से जल्द तकनीकी समस्या को ठीक कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि ऑपरेशन थिएटर तक पूर्ण रूप से बिजली पहुंच सके।
इस घटना ने अस्पताल की आपातकालीन विद्युत व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब करोड़ों रुपये खर्च कर अस्पताल बनाया गया और जनरेटर जैसी वैकल्पिक सुविधा भी उपलब्ध है, तो फिर बिजली गुल होने पर ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था क्यों प्रभावित हुई? क्या जनरेटर की क्षमता में कमी है, विद्युत कनेक्शन में तकनीकी खराबी है या नियमित रखरखाव में लापरवाही बरती जा रही है?
केवल इंजीनियर से जांच कराने का आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा। जरूरी है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की जांच कराए, जनरेटर की कार्यक्षमता, ओटी की विद्युत आपूर्ति और आपातकालीन बैकअप सिस्टम की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में बिजली गुल होने पर किसी गर्भवती महिला को ऑपरेशन जैसी आवश्यक चिकित्सा सुविधा के लिए इंतजार न करना पड़े।
क्योंकि अस्पताल केवल करोड़ों रुपये की लागत से बना भवन नहीं, बल्कि मरीजों को समय पर सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन