Ghansyam Sharma / Sat, Jun 5, 2021 / Post views : 153
धमतरी। जवान बेटे की मौत से दुखी पिता ने मरते सैकड़ों पौधों को पुत्र मान लिया। 15 सालों से सेवा कर पेड़ बनाकर चहूं ओर बंजर जमीन पर हरियाली बिखेर दी। मैदान को बगीचा का स्वरूप दे दिया है। आज इन पेड़ों से ग्रामीणों को फल भी मिलना शुरू हो गया है। साल के 365 दिनों में हर रोज 12 घंटों की सेवा पर्यावरण संवारने के लिए करते हैं। बालोद जिला अंर्तगत गुरुर ब्लाक के ग्राम पेंडरवानी में वर्ष 2006-07 में वन विभाग व पंचायत ने मनरेगा के तहत गांव के मैदान पर आम, आंवला समेत कई पेड़ रोपे।
पौधरोपण के कुछ दिनों बाद देख-रेख के अभाव में पौधों का मरना शुरू हो गया। धार्मिक भावना व सत्य के मार्ग पर चलने वाले पेंडरवानी निवासी 70 वर्षीय भैय्या राम पटेल से यह नहीं देखा गया। उस समय वह अपने जवान पुत्र मुक्तानंद पटेल की मौत से काफी व्यथित थे। ऐसे में मरते पौधों को वह अपना पुत्र मानकर सेवा करना शुरू किया तो आज तक सेवा के लिए हाथ नहीं थका। भैय्याराम पटेल अलसुबह हाथ पर लाठी, सिर में गमछा और खुला बदन पौधों की देखरेख के लिए निकलते हैं, जो उसी शाम को छह बजे घर लौटते हैं।
बकायदा उनके परिजन हर रोज उनके लिए उस बगीचे में खाना लेकर पहुंचते हैं। पौधों की सेवा के लिए गर्मी के दिनों में तापमान का पारा 42 डिग्री हो, बारिश में झमाझम बारिश, कड़कड़ाती बिजली, ठंड में कड़ाके के ठंड हो, वह उसी बगीचे के पास पेड़ के नीचे साल के 365 दिन गुजारते हैं। उनके लिए इस बगीचे के पेड़ व पौधों सब कुछ है। तीज-त्योहार व अन्य जीवन में कोई शौक मायने नहीं रखता।
उनका एक ही लक्ष्य है पौधों को सिंचाई कर पेड़ बनाना और पुत्र की तरह देखरेख करना। इनकी इस पौधों के लिए त्याग, समर्पण और सेवा को देखकर ग्रामीण व अन्य लोग तारीफ करने से नहीं थकते। भैय्याराम पटेल ने बताया कि बगीचे में आज आम, आंवला, कटहल समेत करीब 300 से अधिक पौधे व पेड़ हैं। अब तो आम के पेड़ ने फल देना शुरू कर दिया है।
अपनी कड़ी मेहनत से उन्होंने रेतीली जमीन पर भी पौधों से पेड़ बनाकर बंजर जमीन पर हरियाली बिखेर दी है। भैय्या राम पटेल ने कहा कि वे इन पेड़ों व पौधों को अपना पुत्र मान लिया है। मरते दम तक सेवा करेंगे। परिवार व बगीचा उनके लिए दोनों समान है।
बाल्टी से पहुंचाया पानी
गांव के मैदान चार-पांच एकड़ है, जहां पौधरोपण तो हुआ है, लेकिन सिंचाई के लिए मोटर पंप नहीं है। मैदान से कुछ दूर तेजराम साहू के मोटर पंप से बाल्टी पर पानी लाकर सिंचाई किया है। आज भी यहां मोटर पंप नहीं है। इसके बाद भी 15 सालों तक बाल्टी से पानी लेकर पौधों को पेड़ बना दिया।
आज तक कोई सम्मान नहीं
भैय्याराम पटेल ने बताया कि पौधों की देखभाल के लिए आज तक उन्हें कोई मेहनताना किसी से नहीं मिला है। वहीं विश्व पर्यावरण दिवस पर कभी किसी ने सम्मान नहीं किया। वह सम्मान के भूखे नहीं है। उनका एक ही उद्देश्य पौधों की देखभाल करना। भैय्याराम पटेल गरीब परिवार से है।
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