Ghansyam Sharma / Tue, Jul 27, 2021 / Post views : 154
पांडुका। राजिम से 16 किलोमीटर दूर पर स्थित ग्राम कोपरा जिला गरियाबंद के सबसे बड़े ग्राम कोपरा में कोपेश्वरनाथ मंदिर में प्रथम सोमवार को बाबा कोपेश्वर के दर्शन को लोग उमड़े। बताया जाता है कि पंचकोशी यात्रा का यह आखिरी मंदिर है जो कोपेश्वर नाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है और कुलेश्वर नाथ मंदिर राजिम से प्रारंभ होने वाली पंचकोशी यात्रा कोपेश्वर नाथ मंदिर में समाप्ति होती है।
शिवभक्त बताते हैं कि बाबा सभी की मनोकामना हमेशा पूर्ण करते हैं। ऐसी पंचकोशी यात्रा का मान्यता है। मन्नात पूरा कर कोपेश्वर नाथ बाबा से आशीर्वाद ले घर को यात्रा के बाद जाते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी महाराज मनोहर प्रसाद शर्मा ने बताया कि प्रभु अवघड दानी है जो श्मशान घाट के नजदीक बसे हुए हैं। हमने देखा भी कि कोपेश्वर मंदिर के समीप बाएं तरफ गांव का श्मशान घाट स्थित है और मंदिर के चारों तरफ दलदली तालाब है। पहले इस गांव में 120 तालाब थे जो अतिरमणीय और सुंदर प्राकृतिक नजारों से भरा पड़ा है। मंदिर के पुजारी द्वारा श्रद्घालुओं से कोविड गाइडलाइन का पालन करने का अनुरोध किया जा रहा था और शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए बाबा के दर्शन करें।
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शिवजी का किया जल अभिषेक
सुहेला। क्षेत्र के भोलेनाथ के मंदिरों में सावन मास के प्रथम सोमवार को सुबह से ही लोगों की भीड़ दिखने लगी। रविवार को सावन मास का शुभारंभ हुआ और
दूसरे दिवस सोमवार को शंकरजी के बार होने के कारण सावन मास के प्रत्येक सोमवार को ग्रामीण बच्चे तथा युवतियां उपवास रखते हैं। सोमवार को ग्रामीण सुबह से ही स्नान कर महादेव के मंदिर पहुंचे और शिवलिंग को दूध व जल से जलाभिषेक किया। उसके बाद बेलपत्र, फूल चढ़ाकर हर्षोल्लास के साथ पूजन अर्चन किया और भोलेनाथ से अपनी मन्नातें मांगी।
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