Ghansyam Sharma / Fri, Mar 13, 2026 / Post views : 211
वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों की विवाद में पूरा जंगल ना हो जाए नष्ट
2 दिन में यह हालत तो आने वाले समय में क्या होगा अंजाम
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
जिले में इन दिनों कोण्डागांव वन विभाग के मैदानी अमले और डीएफओ के बीच चल रहा विवाद अब जंगलों तक असर दिखाने लगा है। एक ओर मैदानी वन कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर डटे हुए हैं, तो दूसरी ओर जंगलों में लगातार आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे हालात में सवाल उठने लगा है कि आखिर इस खींचतान की कीमत जंगल और वन्यजीव क्यों चुकाएं?

आज, कुछ घंटे पहले कोण्डागांव वनमंडल के नारंगी वन परिक्षेत्र के आरएफ-843 जंगल में भीषण आग लग गई थी। जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर लगी इस आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया और जंगल में रखे जलाऊ लकड़ी के करीब 15 से 20 चट्टे आग की चपेट में आ गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए , एसडीओ और रेंजर सहित फायर ब्रिगेड की मदद से आग पर काबू पाया जा सका।

लेकिन मामला यहीं नहीं थमा। आग बुझाकर अधिकारी मुख्यालय लौटे ही थे कि शहर से महज 5 किलोमीटर दूर बस्तरिया ढाबा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे जंगल में भीषण आग लगने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने वन विभाग की तैयारियों और आंतरिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इधर वन विभाग के मैदानी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर डीएफओ के खिलाफ हड़ताल पर बैठे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उनसे बेवजह कार्य मे मानसिक दबाव में रखा जाता है। इसी के विरोध में वे आंदोलन पर उतर आए हैं।
वहीं डीएफओ ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह फायर सीजन का समय है और जिन क्षेत्रों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है वहां उनकी मौजूदगी जरूरी है। उनके अनुसार कर्मचारियों द्वारा लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार और मिथ्या हैं।

हालांकि जिले में अब यह चर्चा का विषय बन गया है कि विभाग के भीतर चल रही यह खींचतान कहीं जंगलों की सुरक्षा पर भारी न पड़ जाए। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब विभाग के अंदर ही तालमेल की कमी है तो जंगलों की सुरक्षा और आग से बचाव की जिम्मेदारी आखिर कैसे निभाई जाएगी।
अगर जल्द ही इस विवाद का समाधान नहीं निकला तो न सिर्फ वन संपदा को भारी नुकसान हो सकता है बल्कि जंगलों में रहने वाले वन्य प्राणियों पर भी संकट गहरा सकता है। ऐसे हालात में अब प्रशासन और शासन को भी इस पूरे मामले पर गंभीरता से हस्तक्षेप करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन