Ghansyam Sharma / Tue, Aug 18, 2026 / Post views : 85
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
गायों के संरक्षण और रखरखाव के नाम पर सरकार लाखों-करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही है, विज्ञापन छपवा रही है, बैठकें कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत चीख-चीख कर प्रशासन की नाकामी बता रही है। कोंडागांव से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग आज गौशाला बन चुका है। नतीजा? हर दिन दुर्घटना, हर दिन मौत का खतरा।
आप NH-30 पर निकल जाइए। हाईवे के बीचो-बीच आवारा मवेशियों का झुंड डेरा जमाए दिखेगा। तेज रफ्तार वाहन अचानक ब्रेक लगाते हैं, टकराते हैं, पलटते हैं। पिछले कुछ महीनों में दर्जनों हादसे हो चुके। वाहन चालक घायल, मवेशी मरे या ताउम्र लंगड़े। लेकिन जिम्मेदारो को फर्क नहीं पड़ता।
सबसे शर्मनाक बात ये है कि विगत दिनों सड़क सुरक्षा को लेकर जिले में बैठक हुई थी। कागज पर प्रस्ताव पास हुए, "सड़कों को आवारा मवेशियों से मुक्त करेंगे" का आदेश भी जारी हुआ। नतीजा? वही ढाक के तीन पात। नगर की गलियों से लेकर हाईवे तक मवेशियों की लामबंदी जारी है। राहगीर वाहन बचाते-बचाते खुद की जान बचाते फिर रहे हैं।
स्थानीय लोग अब खून खौलाकर पूछ रहे हैं - "टैक्स का पैसा कहां जा रहा है?" गौशालाओं के नाम पर फंड आता है, जागरूकता अभियान के नाम पर होर्डिंग लगते हैं, लेकिन रात होते ही वही मवेशी सड़क पर।
सवाल ये है कि लगातार निर्देश पर निर्देश जारी होने के बाद भी मवेशी सड़क से हट क्यों नहीं रहे? अगर कल किसी परिवार का चिराग बुझा तो जिम्मेदार कौन होगा? कागजी आदेश या कुर्सी पर बैठे अफसर? जिला प्रशासन अब भी नहीं जागा तो जनता खुद सड़क पर उतरकर "आंदोलन" करने को मजबूर होगी। क्योंकि अब और लाशें नहीं गिनेंगे।
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