Ghansyam Sharma / Thu, Mar 19, 2026 / Post views : 871
कोंडागांव । पत्रिका लुक (पुनम दास मानिकपुरी)
साल के साथ बस्तर में सेमल, करंज,आम आदि पेड़ों की बहुतायत थी,छायादार व फलदार पेड़ो से स्थानीय निवासियों को आर्थिक लाभ भी मिल रहा था, बीते कुछ वर्षों के दौरान बस्तर के इन पेड़ों पर उद्योग माफियाओं के बुरी नजर पड़ी और देखते ही देखते कुछ ही साल के अंदर इलाके से बड़ी संख्या में इन प्रजातियो के पेड़ कटने लगे,अंधाधुंध कटाई के कारण इन पेड़ों के अस्तित्व पर ही अब संकट मंडराने लगा है, उद्योगों के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ो की कटाई के बाद भी वन विभाग की खामोशी चिंता का विषय है।
बीते कुछ वर्षों के अंदर पूरे बस्तर संभाग के ग्रामीण इलाकों से बड़ी तादाद में सेमल, करंज, आम सहित अन्य प्रजातियों के पेड़ काटे जा रहे, और सड़क मार्ग से ट्रकों में भरकर रायपुर के उद्योगों में परिवहन किया जा रहा।पेड़ो को काटने और परिवहन की विधिवत अनुमति तक नहीं ली जाती, और बिना कागजात के अवैध रूप से लकड़ियों का दिनदहाड़े परिवहन होता है,इस अवैध कारोबार में शामिल लोगों की उच्च स्तर पर मजबूत पकड़ होने का हवाला देकर विभाग का मैदानी अमला कार्यवाही से बचने का दावा कर रहा।
लकड़ियां लोड कर रायपुर परिवहन करने वाले एक वाहन चालक ने नाम न प्रकाशक करने की शर्त पर आम और करंज की लकड़ीयां रायपुर टिंबर मिल में लेकर जाना बताया है, उसने पेड़ काटने और परिवहन की अनुमति पत्र नहीं होने का दावा किया साथ ही पेड़ो के मालिकाना हक जताने वाले उन ग्रामीणों को पेड़ के हिसाब से 3 - 5 हजार तक राशि देने की बात कही ।उन्होंने बिना दस्तावेज के परिवहन करना बताया ।उसने कहा कुछ जगहों पर जांच के नाम से गाड़ी रोकने पर कुछ राशि देकर गाड़ी पार करते है,
पर्यावरण विदो की माने तो चुनिंदा प्रजाति के पेड़ों को काटने पर बंदिश नहीं होने के कारण माचिस,फ्लाईवुड आदि उद्योगों के लिए लगातार पेड़ कट रहे।समय रहते इन पेड़ों को बचाने की ओर ध्यान नहीं दिया गया तो इनकी प्रजातियां ही खत्म हो जाएगी, सरकार को इन प्रजाति के पेड़ों को संरक्षित व संवर्धित करने का प्रयास करना चाहिए।
वन मंडलाधिकारी के मुताबिक पेड़ काटने और परिवहन की विधिवत अनुमति वन भूमि पर होने से वन विभाग और राजस्व जमीन पर होने से एसडीएम देता है,उन्होंने बिना अनुमति के पेड़ नहीं कटवाने और परिवहन करने को अवैध बताया।
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