Ghansyam Sharma / Tue, May 5, 2026 / Post views : 72
कोंडागांव। पत्रिका लुक (पुनमदास मानिकपुरी)
जिला मुख्यालय में कृषि भूमि को काटकर अवैध प्लाट बेचने का धंधा बेखौफ चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह सब विभागीय अधिकारियों की नजरों के सामने हो रहा है।
जुलाई 2024 में तात्कालिक कलेक्टर कुणाल दुदावत ने अवैध प्लाटिंग पर रोक का एक आदेश जारी किया था,उसके बाद नगर वासियों में कार्यवाही की उम्मीद जगी थी वही अवैध कारोबार में शामिल लोगों में हड़कंप मचा था।कलेक्टर के तबादले के बाद विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने जानबूझकर संबंधित मामले को हमेशा के लिए फाइलों में दबा दिया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से जिले में अवैध प्लाटिंग का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। रेरा के नियमों को ठेंगा दिखाकर जिला मुख्यालय और आसपास के गांवों में कृषि जमीन को मनमाने दामों पर आवासीय प्लाट बनाकर बेचा जा रहा है। खरीदार चंद पैसे बचाने के लालच में अपनी मेहनत की कमाई फंसा रहे हैं और जिंदगी भर परेशान हो रहे हैं। न रोड, न नाली, न बिजली - सुविधाओं के नाम पर बिल्डर मोटी रकम वसूला जा रहा हैं।
सबसे शर्मनाक बात यह है कि यह पूरा खेल अधिकारियों के संरक्षण में चल रहा है। विभागीय सूत्र खुद बताते हैं कि अवैध प्लाटिंग कुछ अफसरों के लिए कमाई का जरिया बन गई है। कार्रवाई करने के बजाय आधे-अधूरे दस्तावेजों पर ही कई अवैध कॉलोनियों को वैध कर दिया गया। जिन कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं, उन्हें भी क्लीन चिट मिल गई। कुछ और कॉलोनियों को वैध करने की फाइलें अभी भी टेबल पर घूम रही हैं।
सवाल उठता है कि बिना रेरा पंजीयन के नगर में इतनी कॉलोनियां कैसे खड़ी हो गईं? क्या तात्कालिक अधिकारियों को इसकी भनक नहीं थी? या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं? लोगों का सीधा आरोप है कि जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त में विभागीय अमला पूरी तरह शामिल है।
कहा जा रहा अगर मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच हो तो बड़े-बड़े नाम और करोड़ों के घोटाले सामने आ सकते हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस अवैध कारोबार में शामिल अपने ही लोगों पर कार्रवाई की हिम्मत दिखाएगा।
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