Ghansyam Sharma / Tue, Nov 3, 2026 / Post views : 9
रायपुर। पत्रिका लुक
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आज आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की ऊर्जा क्षमता और निवेश की संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। इस दौरान उन्होंने सौर ऊर्जा, बायोगैस, एथेनॉल, ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश की भावी योजनाओं की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में अब तक लगभग 1.26 लाख सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं 1.66 लाख सौर सिंचाई पंपों के माध्यम से करीब 1.94 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई की जा रही है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत 395 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना है।
बायोगैस और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि अवशेष, गोबर और अन्य जैविक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता है। इनके उपयोग से कंप्रेस्ड बायोगैस, बायो-एथेनॉल और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य सरकार इन संभावनाओं को नए उद्योगों और निवेश के अवसरों में बदलने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में कुल 80 मीट्रिक टन क्षमता वाले आठ कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की दिशा में कार्य चल रहा है। इनमें लगभग 800 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त निजी निवेशकों से प्राप्त करीब 6 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर भी प्रक्रिया जारी है।
परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में 1.60 लाख करोड़ के निवेश की परिकल्पना
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ में लगभग 4,200 मेगावाट क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों सहित विभिन्न ऊर्जा परियोजनाओं में करीब 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रही है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की ऊर्जा क्षमता का अधिकतम उपयोग हो, नए उद्योग स्थापित हों और रोजगार के अधिक अवसर सृजित किए जा सकें।
वैश्विक निवेशकों के सामने प्रस्तुत की छत्तीसगढ़ की ऊर्जा क्षमता
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के स्टॉल का अवलोकन किया। यहां प्रदेश की प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं, नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों, आधुनिक तकनीक और निवेश की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया। मुख्यमंत्री ने स्टॉल पर उपस्थित अधिकारियों से विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी ली।
इसके साथ ही देश-विदेश से पहुंचे निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से चर्चा कर छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नीतियों, उपलब्ध संसाधनों और ऊर्जा क्षेत्र में विकसित हो रही अधोसंरचना की जानकारी दी। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और नई परियोजनाओं की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
उल्लेखनीय है कि 2 से 5 नवंबर तक आयोजित इस वैश्विक सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इनमें 40 से अधिक मंत्री, नीति निर्माता, निवेशक और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम सहित नौ देश एवं समूह कंट्री पार्टनर के रूप में शामिल हुए हैं।
सम्मेलन में छत्तीसगढ़ सहित 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनी ऊर्जा क्षमता और निवेश की संभावनाएं प्रस्तुत कीं। 'निवेश, नवाचार और प्रेरणा' की थीम पर आयोजित इस सम्मेलन में छत्तीसगढ़ को पारंपरिक बिजली उत्पादन के साथ हरित ऊर्जा, आधुनिक तकनीक और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में अपनी भावी योजनाएं वैश्विक निवेशकों के सामने रखने का अवसर मिला।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित छत्तीसगढ़ के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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