कोंडागांव पुलिस की सूझबूझ और समर्पण बना सफलता की मिसाल,
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
कोंडागांव पुलिस ने एक जघन्य हत्या के मामले में जिस तरह से गंभीरता दिखाई, वह जिले की कानून-व्यवस्था की मजबूती और पुलिस की तकनीकी दक्षता का उदाहरण है। महज एक अज्ञात शव से शुरू हुई जांच, एक ऐसा मुकाम हासिल कर गई जिसने पूरे पुलिस महकमे की कार्यशैली पर भरोसा और बढ़ा दिया।
अज्ञात शव से शुरू हुई कहानी
दिनांक 30 जून को उड़ीसा के मगेदा जंगल में एक अज्ञात शव मिलने की सूचना थाना माकड़ी को मिली। शव की स्थिति अत्यंत खराब थी। प्रथम दृष्टया पहचान संभव नहीं थी, परंतु पुलिस की बारीकी से की गई तलाशी में मृतक के पैंट से एक जली हुई एंटी-रेबीज पर्ची और वैक्सीनेशन कार्ड बरामद हुआ। यही कागज टुकड़ा पूरे मामले की कुंजी बन गया।
पहचान से शुरू हुई जांच
पर्ची में दर्ज नाम “धर्मवीर, उम्र 33 वर्ष, निवासी नगरी” के आधार पर तमिलनाडु के धरमपुरी अस्पताल से संपर्क किया गया। पता चला कि धर्मवीर नेताम नामक व्यक्ति वहां इलाज हेतु भर्ती था, और 27 जून को उसका मित्र विदेश मरकाम उसे अस्पताल से लेकर चला गया था। इसके बाद से धर्मवीर का कोई अता-पता नहीं था।
पुलिस टीम ने मृतक की पत्नी रवीना नागरची से संपर्क किया। जब शव की तस्वीरें दिखाई गईं, तो उसने मृतक की पहचान अपने पति धर्मवीर नेताम के रूप में की। यहीं से मामले ने रफ्तार पकड़ी।
तकनीकी साक्ष्यों का सफल इस्तेमाल
जांच टीम ने न केवल धरातलीय साक्ष्य जुटाए, बल्कि मोबाइल टॉवर डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज का गहन विश्लेषण किया।
सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल टॉवर लोकेशन, कॉल डिटेल्स और डिजिटल डाटा एनालिसिस का ऐसा समन्वय हुआ जो आमतौर पर महानगरों में देखा जाता है। पुलिस ने संदेह के दायरे में आए नंबरों की गतिविधियों को खंगाला, संदिग्धों की आवाजाही को ट्रेस किया और उन तमाम डिजिटल निशानों को जोड़ा, जिससे हत्या का राज खुलता गया।
घटनास्थल के टॉवर से प्राप्त डेटा में विदेश मरकाम की लोकेशन हत्या के समय के आसपास उसी क्षेत्र में पाई गई। साथ ही उसकी पत्नी रवीना के साथ लगातार संवाद, लोकेशन बदलाव और मोबाइल नंबर स्विच करने की जानकारी सामने आई।
इस बीच सूचना मिली कि विदेश मरकाम तमिलनाडु से लौटकर कोण्डागांव की ओर आ रहा है। सायबर टीम और थाना माकड़ी पुलिस ने त्वरित घेराबंदी कर उसे कोंडागांव बस स्टैण्ड से गिरफ्तार कर लिया।
कबूलनामे ने खोला सारा राज
विदेश मरकाम ने पूछताछ में बताया कि उसका मृतक की पत्नी रवीना से प्रेम संबंध था। धर्मवीर इस रिश्ते का विरोध करता था और रवीना को प्रताड़ित करता था। दोनों ने मिलकर धर्मवीर की हत्या का षड्यंत्र रचा।
27 जून को विदेश मरकाम उसे अस्पताल से लेकर निकला और नगरी के बजाय उसे उड़ीसा के जंगलों की ओर ले गया। रास्ते में बार-बार शराब पिलाई गई। फिर रायघर में क्रिकेट बैट खरीदा गया और जंगल में ले जाकर धर्मवीर के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर उसकी हत्या कर दी गई। पहचान मिटाने के लिए पेट्रोल से शव जलाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन बारिश के कारण शव पूरी तरह जल नहीं सका।
पुलिस टीम की मुस्तैदी लाई सफलता
इस पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक वाय. अक्षय कुमार के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम ने सराहनीय कार्य किया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कौशलेन्द्र देव पटेल, एसडीओपी रूपेश कुमार के नेतृत्व में गठित टीम में साइबर सेल, थाना माकड़ी और
तकनीकी विश्लेषकों का विशेष योगदान रहा
जिन पुलिसकर्मियों ने विशेष भूमिका निभाई उनमें निरीक्षक सौरभ उपाध्याय, अमिताभ खण्डेकर, लूमन भण्डारी, रीतूराज सिंह, विकास बघेल, गिरीश कतलम, दशरथ मकराम, बीजू यादव, जितेन्द्र मरकाम सहित महिला आरक्षक सुगंतीन का उल्लेखनीय सहयोग रहा।
अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून की पकड़ से नहीं बच सकता- पुलिस
जघन्य हत्या की गुत्थी सुलझाने के बाद कोण्डागांव पुलिस अधीक्षक वाय अक्षय कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस कर हत्या का खुलासा किया साथ ही ओर स्पष्ट संदेश दिया है कि कोई भी अपराधी पुलिस की सतर्क निगरानी और तकनीकी जांच से बच नहीं सकता।
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