Ghansyam Sharma / Sun, Mar 29, 2026 / Post views : 179
नारायणपुर। पत्रिका लुक
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और दुर्गम इलाकों में तैनात सुरक्षा बलों ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है। नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के भीतर बसे सुदूर ग्राम बोटेर से एक दिल छू लेने वाली घटना सामने आई है, जहां आईटीबीपी और पुलिस के संयुक्त प्रयास से एक गर्भवती महिला और उसके नवजात की जान बचाई गई।
जानकारी के अनुसार, ग्राम बोटेर की एक गर्भवती महिला अचानक प्रसव पीड़ा से तड़पने लगी। क्षेत्र अत्यंत दुर्गम होने के कारण वहां न तो सड़क सुविधा है और न ही तत्काल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं। महिला की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी, जिससे परिजनों ने सुरक्षा बलों से मदद की गुहार लगाई।
सूचना मिलते ही भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की 29वीं बटालियन और नारायणपुर पुलिस की टीम ने बिना देर किए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। जवानों ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए करीब 5 किलोमीटर तक घने जंगल, ऊंचे-नीचे पहाड़ और कच्चे रास्तों को पार किया।
जवानों ने महिला को स्ट्रेचर पर लिटाकर कंधों के सहारे सुरक्षित बाहर निकाला। यह अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि रास्ते में फिसलन भरी चढ़ाई, संकरे रास्ते और प्राकृतिक बाधाएं लगातार सामने आ रही थीं। इसके बावजूद जवानों ने धैर्य और साहस का परिचय देते हुए महिला को समय पर सुरक्षित बाहर पहुंचाया।
रेस्क्यू के बाद महिला को तत्काल ओरछा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका सफल प्रसव कराया गया। राहत की बात यह रही कि मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सुरक्षा बल केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कठिन हालात में लोगों के जीवन रक्षक भी बनते हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने इस मानवीय कार्य के लिए आईटीबीपी और पुलिस जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया है।
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