Ghansyam Sharma / Mon, May 19, 2025 / Post views : 152
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
कोण्डागांव जिला मुख्यालय से मात्र 16 किलोमीटर दूर स्थित मुलमुला गांव इन दिनों गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहा है। जल जीवन मिशन योजना के तहत गांव में दो बार पेयजल आपूर्ति के लिए योजनाएं चलाई गईं, मगर दोनों बार ही योजना धरातल पर सफल नहीं हो सकी। गांव में महीनों से पानी की सप्लाई ठप पड़ी है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार पीएचई विभाग को सूचना दी, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकाला गया। पहले निर्मल ग्राम जल योजना के तहत गांव में पानी की टंकी और पाइपलाइन बिछाकर घर-घर कनेक्शन दिए गए थे, जिससे नियमित पानी मिल रहा था। लेकिन जब जल जीवन मिशन के अंतर्गत पुरानी पाइपलाइन में बिना जांच किए नई लाइनें जोड़ी गईं, तब से आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है।
ग्राम सचिव का बयान
ग्राम सचिव शंभु नेताम ने पेयजल संकट की पुष्टि करते हुए बताया, "जब से जल जीवन मिशन के तहत कार्य शुरू हुआ है, तब से ही आधे गांव में पानी की सप्लाई बंद हो गई है। ग्रामीणों ने इस बारे में कई बार शिकायत दर्ज करवाई है, यहां तक कि सुशासन तिहार में भी इस समस्या को उठाया गया, मगर आज तक इसका कोई समाधान नहीं निकाला गया है।"
बड़ी लापरवाही के आरोप
योजना के तहत नए बोर नहीं कराए गए, बल्कि पुराने हैंडपंप में मोटर लगाकर सप्लाई की जा रही है, जो नाकाफी साबित हो रही है। यही नहीं, लाखों की लागत से घर-घर नल कनेक्शन तो बना दिए गए, पर पानी की एक बूंद तक नहीं पहुंची है। खास पारा से अस्पताल पारा तक के क्षेत्र में लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।
जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता उजागर
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सब इंजीनियर और अन्य जिम्मेदार अधिकारी फील्ड में निरीक्षण तक नहीं कर रहे हैं, जिसके चलते कार्यों में भारी अनियमितता सामने आई है। कई रसूखदारों ने सार्वजनिक हैंडपंप पर मोटर लगाकर उसे अपने कब्जे में ले लिया है, जिससे आम ग्रामीणों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
भ्रष्टाचार की जांच की मांग
ग्रामीणों ने कहा कि दो बार योजना में करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद न तो स्टोरेज टंकी बनी और न ही सही तरीके से पाइपलाइन बिछाई गई। न तो वाल ठीक से लगाए गए, न ही तकनीकी जांच की गई। यह सब भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की अपील की है।कुल मिलाकर लापरवाही
सरकार की मंशा गांव-गांव स्वच्छ जल पहुंचाने की है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही से यह योजना बदनामी की ओर बढ़ रही है। यदि शीघ्र सुधार नहीं हुआ, तो ग्रामीणों की पीड़ा और आक्रोश और अधिक बढ़ सकता है।
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