Ghansyam Sharma / Wed, Nov 4, 2026 / Post views : 43
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
जिले में धान खरीदी से पहले किसानों को होने वाली संभावित परेशानियों और पंजीयन संबंधी समस्याओं को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) जिला परिषद कोण्डागांव ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। 3 नवंबर को CPI जिला सचिव एवं अन्य कम्युनिस्ट सदस्यों ने महामहिम राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के नाम संबोधित ज्ञापन कलेक्टर कार्यालय के माध्यम से सौंपकर किसानों की समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया है कि पिछले वर्ष जिले के कई किसान गिरदावरी नहीं होने, वन अधिकार पट्टा धारक किसानों का धान विक्रय के लिए पंजीयन नहीं होने तथा रकबे में त्रुटियों के कारण अपना पूरा धान समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पाए थे। इसके चलते किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई किसानों को मजबूरी में खुले बाजार में कम कीमत पर धान बेचना पड़ा।
CPI ने आरोप लगाया है कि इस वर्ष भी किसानों के सामने ऐसी ही समस्याएं सामने आ रही हैं। ज्ञापन के अनुसार पंजीकृत किसानों के गिरदावरी कार्य के लिए बनाए गए पीवी ऐप में कई किसानों के खसरा नंबर प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं। वहीं गिरदावरी कार्य के महत्वपूर्ण समय में हल्का पटवारियों के आंदोलन पर रहने के कारण आवश्यक प्रक्रिया प्रभावित होने की बात कही गई है।
प्रमुख मांगें रखीं
CPI जिला परिषद ने मांग की है कि पिछले वर्ष धान विक्रय से वंचित रह गए किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए इस वर्ष ऐसी स्थिति दोबारा निर्मित न हो। जिले के सभी पंजीकृत किसानों की गिरदावरी समय-सीमा में पूरी कराई जाए तथा वन अधिकार पट्टा धारक किसानों का धान विक्रय के लिए पंजीयन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही रकबे और खसरा नंबर से संबंधित त्रुटियों को तत्काल सुधारा जाए, ताकि कोई भी पंजीकृत किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित न रहे।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि यदि प्रशासनिक लापरवाही या तकनीकी समस्याओं के कारण किसान धान खरीदी केंद्रों में अपना धान समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पाते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी और प्रभावित किसानों को समर्थन मूल्य के अनुसार भुगतान सुनिश्चित कराया जाए।
समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
CPI जिला परिषद कोण्डागांव ने शासन-प्रशासन से ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर तत्काल आवश्यक कदम उठाने तथा संगठन को लिए गए निर्णय से अवगत कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी अपने अन्य संगठनों, सदस्यों एवं व्यापक जनसमर्थन के साथ जन आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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