Ghansyam Sharma / Thu, Sep 18, 2025 / Post views : 200
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
कोण्डागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक के सोड़मा गांव की 16 वर्षीय गणेश्वरी मण्डावी की कहानी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की असली जमीन की सच्चाई बयां करती है। जन्म से पूर्ण रूप से विकलांग यह बच्ची पहले पंचायत से सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त करती थी, लेकिन पिछले तीन वर्षों से यह सहायता बंद हो चुकी है।
गणेश्वरी के पिता ने बताया कि वह स्कूल में रसोइया के रूप में कार्य करते हैं और यही परिवार की आजीविका का मुख्य साधन है। “पेंशन राशि बच्ची के इलाज और देखभाल के लिए सहारा थी। अगर यह मिल जाता, तो इलाज का खर्च भी निकल आता, उन्होंने दुखी मन से कहा।
सरपंच और सचिव ने बीते दिनों आश्वासन दिया था कि पेंशन जल्द शुरू हो जाएगी, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी राहत नहीं मिली है।
बड़ा रोड़ा – आधार कार्ड
राज्य और केंद्र सरकार द्वारा विकलांग बच्चों के लिए कई योजनाएँ संचालित हैं, लेकिन गणेश्वरी अब तक इन योजनाओं से वंचित है। कारण है – आधार कार्ड का न बन पाना। पालक का कहना है कि कई प्रयासों के बावजूद आधार कार्ड नहीं बन पाया, और यही सबसे बड़ी बाधा बन गई।
गांव के लोग भी इस स्थिति पर नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को ऐसे मामलों में विशेष छूट देनी चाहिए ताकि बच्चे समय पर योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।
गणेश्वरी की कहानी न केवल एक गरीब परिवार की तकलीफ को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि ज़मीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में कितनी खामियां हैं। इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या सरकारी प्रणाली विकलांग बच्चों और गरीब परिवारों तक वास्तविक मदद पहुंचाने में सक्षम है।
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