Ghansyam Sharma / Mon, Sep 1, 2025 / Post views : 212
लंबे संघर्ष, आंदोलन और धैर्य का मिला फल – कोण्डागांव में 16 शिक्षाकर्मी पहुंचे स्कूल के सर्वोच्च पद पर
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
1995-98 के वे दिन याद हैं, जब शिक्षाकर्मी का वेतन चपरासी से भी कम था और नाम सूची में प्यून के नीचे लिखा जाता था। लोग हमें ‘शिक्षाकर्मी’ कहकर अपमानित करते थे। आज वही संवर्ग स्कूलों के प्राचार्य बने हैं।
यह कहना है छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष ऋषिदेव सिंह का, जिन्होंने शिक्षाकर्मियों की इस लंबी लड़ाई को बेहद करीब से जिया है।
दरअसल, 28 साल की सेवा और संघर्ष के बाद प्रदेशभर के 301 तथा कोण्डागांव जिले के 16 व्याख्याताओं को प्राचार्य पदोन्नति मिली है। यह उपलब्धि केवल पदोन्नति भर नहीं, बल्कि शिक्षाकर्मी आंदोलन के उस इतिहास की गवाही है जिसने वर्षों तक पंचायत-नगरीय निकाय व्यवस्था के तहत शोषण झेला।
ऋषिदेव सिंह बताते हैं कि 1998 से सेवा कर रहे शिक्षाकर्मियों को समान योग्यता और दक्षता के बावजूद न तो पदोन्नति दी गई और न ही समयमान। यही कारण था कि कभी संयुक्त मोर्चा तो कभी संघर्ष मोर्चा बनाकर, धरना-प्रदर्शन, रैली और अदालत की चौखट तक जाकर आवाज बुलंद करनी पड़ी।
आज जब वही शिक्षाकर्मी स्कूल के सर्वोच्च पद प्राचार्य की कुर्सी पर सुशोभित हैं तो यह संघर्ष की जीत और आत्मसम्मान की पुनःस्थापना है। यह सचमुच शून्य से शिखर और फर्श से अर्श तक पहुँचने का प्रतीक है। यह श्रेय केवल अध्यक्षों का नहीं, बल्कि उन तमाम साथियों का है जिन्होंने संघर्ष की लड़ाई लड़ी और हार नहीं मानी।– वे कहते हैं।
कोण्डागांव जिले में प्राचार्य बने संजय राठौर, इरसाद अंसारी, अनूप विश्वास, त्रिनाथ जोशी, वर्षा सैमसंग, कमलुराम बड्डे, प्रदीप मंडावी, श्यामलता पद्माकर, सखाराम बघेल, नोहेश्वर वर्मा, चंद्रकांता झा, श्यामलाल श्रीमाली, हरिशंकर पोटाई, भूपेश नाविक, तेज सिंह ठाकुर एवं काशीराम प्रधान को एसोसिएशन ने बधाई दी है।
हालाँकि, व्याख्याता एलबी संवर्ग अभी भी सेवा गणना और पेंशन लाभों को लेकर चिंतित है। शिक्षकों की उम्मीद है कि सरकार प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना कर उन्हें पूर्ण न्याय दिलाएगी।
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