Ghansyam Sharma / Thu, May 21, 2026 / Post views : 52
रायपुर। पत्रिका लुक
छत्तीसगढ़ की समृद्ध जल-संरचना और अनुकूल जलवायु के कारण मछली पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का बड़ा माध्यम बन गया है। राज्य सरकार की योजनाओं और मछुआरा हितैषी नीतियों से प्रदेश आज मत्स्य बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर होकर देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। राजधानी रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में मत्स्य पालन मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि छत्तीसगढ़ देश में अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन में छठवें स्थान पर है, जहाँ प्रतिवर्ष 9.59 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन हो रहा है।
प्रदेश के 2.081 लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र में से 96.25 प्रतिशत क्षेत्र को मत्स्य पालन के अंतर्गत विकसित किया जा चुका है, जिससे 2.25 लाख से अधिक मछुआरों को रोजगार मिला है। मंत्री ने कहा कि मछली पालन को कृषि का दर्जा मिलने से बिजली दरों में छूट, ब्याज मुक्त ऋण और पानी की दरों में राहत मिल रही है।
प्रदेश में केज कल्चर, आरएएस और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। रायपुर और कांकेर में “गिफ्ट तिलापिया” क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। राज्य में 606 करोड़ से अधिक मत्स्य बीज उत्पादन हो रहा है तथा कई राज्यों को इसकी आपूर्ति की जा रही है। पिछले एक वर्ष में मत्स्य उत्पादन में 11.75 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।
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