कोण्डागांव। पत्रिका लुक
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के शिक्षक राजेन्द्र राव ने एक अनोखा कार्य कर दिखाया है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपरा को सहेजने के उद्देश्य से सात अध्यायों और करीब 24 हजार श्लोकों वाली रामायण को पांच फीट के दुपट्टे में चित्रों के माध्यम से उकेर दिया है।
इस अनोखी कलाकृति के पीछे न तो किसी प्रकार का लोभ था और न ही प्रतिष्ठा की चाह। उनका उद्देश्य सिर्फ इतना है कि आज की युवा पीढ़ी को भगवान राम के आदर्श जीवन से परिचित कराया जाए और भारतीय संस्कृति को जीवित रखा जाए।
चित्रों में संजोई राम की गाथा
राजेन्द्र राव ने इस दुपट्टे को एक कैनवास की तरह उपयोग कर भित्ति चित्र शैली में रामायण के सभी प्रमुख प्रसंगों को चित्रित किया है। वे बताते हैं कि बस्तर की संस्कृति अपने आप में अद्भुत और समृद्ध है। अगर किसी को किसी विषय को सरलता से समझाना हो, तो चित्र एक सशक्त माध्यम बन सकता है। यही सोचकर उन्होंने इस प्रयास को आकार दिया।
बस्तर की कला और रामकथा का अनूठा संगम
राव का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी मॉडर्न आर्ट की ओर अधिक आकर्षित होती है, लेकिन उसमें हमारी संस्कृति की झलक नहीं मिलती। ऐसे में अगर उनके पास रामायण चित्रित दुपट्टा होगा, तो वो सिर्फ एक परिधान नहीं बल्कि संस्कृति की पहचान बन जाएगा। वे कहते हैं, "आज रंग-बिरंगे मॉडर्न दुपट्टे आम बात हो गई है, लेकिन जब लोगों के पास रामायण की चित्रकारी वाला दुपट्टा होगा, तो उन्हें यह समझ आएगा कि रामायण क्या है, राम कौन हैं, और उनका जीवन हमें क्या सिखाता है।
संस्कृति से जुड़ाव की पहल
राजेन्द्र राव का यह प्रयास न केवल शिक्षा और संस्कृति का अद्भुत संगम है, बल्कि यह एक ऐसी प्रेरणा है, जिससे आज का युवा अपने मूल्यों, परंपराओं और आदर्शों से फिर से जुड़ सकता है। उनका यह कार्य बस्तर की कला, भारतीय महाकाव्य और लोक संस्कृति का ऐसा संगम है, जो आने वाले समय में न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना का पात्र बन सकता है। यह सिर्फ एक दुपट्टा नहीं, बल्कि संस्कृति को बचाने का संदेश है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन