Ghansyam Sharma / Mon, Jul 21, 2025 / Post views : 168
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
बस्तर रेंज के माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और पुनर्स्थापना की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर एक सशक्त प्रयास जारी है। "पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन" नामक यह अभियान अब एक साधारण पुनर्वास योजना नहीं, बल्कि समावेशी सामाजिक जागरूकता और बदलाव का प्रतीक बनता जा रहा है।
बस्तर संभाग के सातों जिलों—सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर और कांकेर—में चरणबद्ध रूप से चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें एक सम्मानजनक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन की ओर ले जाना है।
कौशल से सशक्तिकरण की ओर
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को पुनर्वास केंद्रों में कौशल विकास, स्वरोजगार संवर्धन, आजीविका साधन, मानसिक परामर्श और सामाजिक पुनःस्थापना की सुविधाएं दी जा रही हैं। प्रशासन का मानना है कि इससे वे न केवल अपनी नई पहचान गढ़ सकेंगे, बल्कि समाज के विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।
विचारधारा से मुक्ति, विकास की ओर दृष्टि
इस अभियान का उद्देश्य केवल माओवादियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करना नहीं, बल्कि हिंसा और भय के वातावरण को समाप्त कर बस्तर को समरस, शांतिपूर्ण और विकसित क्षेत्र के रूप में स्थापित करना है। माओवादी संगठन की जनविरोधी और दिशाहीन होती सोच से अब ग्रामीण जन भी मोहभंग की स्थिति में हैं।
आत्मसमर्पण की बढ़ती संख्या
राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर बीते 18 महीनों में बस्तर रेंज में 1400 से अधिक माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ चुके हैं। इनमें कई वांछित माओवादी नेता और सक्रिय कैडर शामिल हैं, जो अब समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नया जीवन शुरू कर चुके हैं।
अपील: लौटें शांति की राह पर
प्रशासन द्वारा माओवादियों से यह निरंतर अपील की जा रही है कि वे हिंसा त्यागकर समाज में वापस लौटें। यह निर्णय न केवल उनके परिवार और भविष्य के लिए सकारात्मक होगा, बल्कि एक स्थायी और सुरक्षित बस्तर के निर्माण में भी उनकी भूमिका अहम होगी।
पुनर्वास का नया दृष्टिकोण
पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” एक ऐसी पहल है, जो प्रशासन, समाज और आत्मसमर्पित माओवादियों के सहयोग से बस्तर को हिंसा से मुक्ति दिलाकर एक शांतिपूर्ण बदलाव की ओर ले जा रही है। यह विश्वास जगाया जा रहा है कि परिवर्तन संभव है — और उसका समय अब आ चुका है।
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