Ghansyam Sharma / Tue, Feb 17, 2026 / Post views : 207
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नक्सल मुक्त बस्तर की दिशा में सुकमा पुलिस को बड़ी सफलता
सुकमा । पत्रिका लुक
सुकमा जिले में चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत एक बड़ी सफलता सामने आई है। माओवादी संगठन में सक्रिय 01 महिला सहित कुल 22 माओवादी सदस्यों ने छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति और सुकमा पुलिस द्वारा संचालित ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिले में लगातार सफल नक्सल विरोधी अभियानों, नए सुरक्षा कैम्पों की स्थापना, सुदृढ़ सड़क संपर्क और विकास कार्यों की बढ़ती पहुँच के कारण माओवादी संगठन का प्रभाव तेजी से कमजोर हुआ है। इसी के परिणामस्वरूप माओवादी संगठन से जुड़े सदस्यों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ आत्मसमर्पण
दिनांक 17 फरवरी 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय, सुकमा में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक श्री किरण चव्हाण (IPS) के समक्ष सभी 22 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इस अवसर पर डीआईजी सीआरपीएफ रेंज जगदलपुर, सीआरपीएफ 227 वाहिनी के कमांडेंट, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नक्सल ऑप्स) सहित पुलिस व अर्द्धसैनिक बलों के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
आत्मसमर्पण कराने में डीआरजी सुकमा, जिला पुलिस बल, रेंज फील्ड टीम (आरएफटी) जगदलपुर तथा केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की विभिन्न वाहिनियों एवं कोबरा बटालियन की आसूचना शाखा की विशेष भूमिका रही।
पुनर्वास नीति के तहत मिलेंगी सुविधाएँ
पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पित सभी माओवादियों को शासन की ‘छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति–2025’ के तहत प्रत्येक को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि सहित अन्य पुनर्वास सुविधाएँ प्रदान की जाएँगी, जिससे वे सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें।
नक्सल मुक्त बस्तर की ओर कदम
सुकमा पुलिस का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से अभियान लगातार जारी रहेगा। सुदूर वनांचल क्षेत्रों में विकास कार्यों की पहुँच बढ़ाकर और पुनर्वास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से आने वाले समय में और भी माओवादी मुख्यधारा से जुड़ेंगे।
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