Ghansyam Sharma / Thu, Sep 4, 2025 / Post views : 214
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
बाबा रामदेव उत्सव समिति कोण्डागांव द्वारा पिरों के पीर बाबा रामदेव सा पीर का वार्षिक उत्सव इस वर्ष भी श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया। 4 सितम्बर को नगर में बाबा रामदेव सा पीर की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें नगरवासियों ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ भागीदारी निभाई।
शाम 4 बजे बाबा रामदेव मंदिर से प्रारंभ हुई यह शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए देर रात मंदिर प्रांगण पहुंचेगी। शोभायात्रा में आकर्षक झांकी, धार्मिक संगीत की गूंज ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। नगरभर में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा का स्वागत कर व पूजा अर्चना की और श्रद्धापूर्वक प्रसादी वितरण किया।
इस दौरान समाज के महिला-पुरुष, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए। शाम होते-होते पूरा नगर बाबा रामदेव जी के भजनों और "जय बाबा री" के जयकारों से गूंज उठा। शोभायात्रा के समापन पर मंदिर प्रांगण में सामूहिक भजन संध्या, महा आरती और महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे ।
बाबा रामदेव जी का जीवन व संदेश
बाबा रामदेव जी का जन्म लगभग 15वीं शताब्दी में राजस्थान के पोकरण (जैसलमेर) जिले के रूणिछा गांव में हुआ था। वे बचपन से ही करुणा, परोपकार और मानव सेवा के प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने समाज में व्याप्त भेदभाव, ऊँच-नीच और जातिगत बंधनों को तोड़कर सभी को समानता का संदेश दिया। इसी कारण उन्हें ‘पिरों के पीर’ या ‘रामसापीर’ कहा जाता है।
बाबा रामदेव जी की खासियत यह रही कि वे हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के आराध्य हैं। उन्होंने भक्ति, सेवा और भाईचारे को ही जीवन का सच्चा धर्म बताया। उनके अनुयायी न केवल राजस्थान बल्कि पूरे भारत और विदेशों तक फैले हुए हैं।
रामदेवरा मेला
हर वर्ष राजस्थान के रामदेवरा (पोकरण) स्थित समाधि स्थल पर भव्य मेला आयोजित होता है, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुँचते हैं। मान्यता है कि बाबा रामदेव जी अपने भक्तों की सच्ची प्रार्थना अवश्य सुनते हैं और उनकी मनोकामनाएँ पूरी करते हैं।
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