Ghansyam Sharma / Thu, Sep 11, 2025 / Post views : 215
रायपुर। पत्रिका लुक
बंधुत्व की शुरुआत अपने घर से होनी चाहिए, तभी पूरे विश्व में बंधुत्व की भावना स्थापित हो सकेगी।” यह विचार राज्यपाल रमेन डेका ने आज विश्व बंधुत्व दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए।
स्वामी विवेकानंद कन्याकुमारी केंद्र शाखा रायपुर के सौजन्य से दुर्गा महाविद्यालय के सभागार में यह संगोष्ठी आयोजित हुई। कार्यक्रम में राज्यपाल बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। गौरतलब है कि वर्ष 1893 में इसी दिन स्वामी विवेकानंद ने शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में अपने ऐतिहासिक उद्बोधन के माध्यम से भारत की महान संस्कृति और परंपरा को विश्व के सामने रखा था। तभी से इस दिन को विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में मनाया जाता है।
अपने संबोधन में राज्यपाल डेका ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने 1893 में जो ज्ञान का दीप प्रज्ज्वलित किया था, उसकी लौ आज भी जगमगा रही है। “हमें उस लौ को भाईचारे, सेवा और सकारात्मक सोच से अपने जीवन में जलाए रखना होगा।” उन्होंने कहा कि विवेकानंद ने मानवता को सर्वोपरि मानते हुए भारत की महान संस्कृति और अध्यात्म का संदेश पूरी दुनिया तक पहुँचाया।
राज्यपाल ने वर्तमान समय की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन, जल संकट और माइक्रोप्लास्टिक मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। छत्तीसगढ़ में पर्याप्त वर्षा होने के बावजूद भू-जल स्तर का लगातार गिरना चिंता का विषय है। इसके समाधान के लिए वर्षा जल संरक्षण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और किसानों की खाली पड़ी भूमि पर डबरी निर्माण जैसे कदम आवश्यक हैं।
युवाओं को प्रेरित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि “यह न सोचें कि समाज आपको क्या दे रहा है, बल्कि यह सोचें कि आप समाज को क्या दे सकते हैं।” जीवन में सफलता के लिए अनुशासन और समय का पालन जरूरी है। परिवार के बुजुर्गों का सम्मान और भाई-बहन के बीच स्नेह समाज में बंधुत्व की भावना को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि कृत्रिम जीवन के बजाय प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की कोशिश करें।
संगोष्ठी की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. प्रोतिभा मुखर्जी साहूकार ने की। मुख्य वक्ता के रूप में जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त मुख्य वन संरक्षक श्री राकेश चतुर्वेदी ने स्वामी विवेकानंद के जीवन, कार्य और आदर्शों पर विस्तार से प्रकाश डाला। संजीव गुप्ता ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का स्वागत भाषण सुभाष चंद्राकर ने दिया, संचालन श्रीमती शजिन्ता शुक्ला ने किया और आभार प्रदर्शन चेतन तारवानी ने किया।
इस अवसर पर विवेकानंद केंद्र के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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