Ghansyam Sharma / Fri, Aug 22, 2025 / Post views : 178
कोंडागांव में पीएम आवास योजना की सच्चाई : कागजों में प्रगतिरत, जमीन पर अधूरे घर
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना की हकीकत कागजों से बहुत अलग है। योजना का लाभ पाने वाले कई हितग्राही आज भी अपने आधे-अधूरे घरों को देख परेशान हैं। आरोप है कि आवास सूची जारी होते ही कुछ लोग ठेकेदार और सप्लायर बनकर हितग्राहियों तक पहुंचे, उनका भरोसा जीतकर राशि वसूल की और घर अधूरे छोड़कर फरार हो गए।
मामला सिर्फ ग्राम भीरागांव (अ) तक सीमित नहीं है, बल्कि जनपद के कई पंचायतों में ऐसी ही तस्वीर देखने को मिल रही है। कई आवास निर्माण के नाम पर भ्रष्टाचार और ठगी का शिकार हुए हैं। जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि नियमित मॉनिटरिंग कराकर समय पर निर्माण पूरा कराएं, वे अब लापरवाह रवैया अपनाए हुए हैं और अधूरे आवासों को विभागीय दस्तावेजों में ‘प्रगतिरत’ बताकर मामले को दबा रहे हैं।
हितग्राहियों का आरोप
भीरागांव (अ) की बुधरी बाई सहित कई हितग्राहियों ने बताया कि आवास स्वीकृत होने के बाद दो साल पहले कुछ लोग आवास मित्र के साथ पहुंचे। उन्होंने खुद को ठेकेदार बताते हुए कहा कि वे ही मकान तैयार करेंगे। लाभार्थियों को समझाया गया कि किस्त राशि निकालकर सीधे उन्हें दें। शुरुआत में नींव खोदकर काम शुरू किया गया, लेकिन पहली किस्त मिलने के बाद ठेकेदार निर्माण अधूरा छोड़कर भाग निकले। अब स्थिति यह है कि लाभार्थियों की राशि खर्च हो चुकी है और मकान अधूरा पड़ा है।
आधे-अधूरे आवासों से चिंतित लोग
लाभार्थियों का कहना है कि अधूरा घर न तो रहने लायक है और न ही आगे निर्माण की राशि उनके पास है। इस वजह से वे खुले आसमान तले जीवन यापन करने को मजबूर हैं। वहीं पंचायत स्तर पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
सचिव का बयान
ग्राम पंचायत भीरागांव (अ) के सचिव सुखराम देवांगन ने बताया कि पंचायत में कुल 77 आवास स्वीकृत हुए थे, जिनमें से अब तक केवल 10 आवास पूर्ण हैं, बाकी प्रगतिरत हैं। उनका कहना है कि अधिकांश अधूरे मकान पूर्व सचिव के कार्यकाल से जुड़े हुए हैं और बरसात की वजह से निर्माण कार्य धीमा पड़ा है।
जांच की मांग
ग्रामीणों का मानना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की वास्तविक स्थिति उजागर करने के लिए उच्चस्तरीय जांच जरूरी है। तभी यह साफ हो सकेगा कि लाभार्थियों से ठगी किसने की और विभागीय स्तर पर किसकी मिलीभगत से अधूरे मकानों को ‘प्रगतिरत’ दिखाकर फाइलों में प्रगति दर्शाई जा रही है।
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