Ghansyam Sharma / Wed, Jul 30, 2025 / Post views : 205
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
सीपीआई जिला परिषद् कोण्डागांव के सदस्यों ने दुर्ग रेलवे स्टेशन पर घटी हालिया घटना पर गहरी नाराज़गी व्यक्त की है, जिसमें दो नन्स को मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। घटना के वीडियो के वायरल होने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
सीपीआई ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि शुक्रवार को वायरल वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि एक तथाकथित हिंदू संगठन से जुड़ी महिला ने पुलिस की मौजूदगी में आदिवासी समुदाय के एक युवक और तीन युवतियों के साथ-साथ दोनों नन्स से सख्त लहजे में पूछताछ की। महिला ने आदिवासी युवतियों के निजी बैग्स छीनकर उनकी तलाशी भी ली। इस पूरे घटनाक्रम में महिला का रवैया ऐसा प्रतीत हुआ मानो वह किसी पुलिस अधिकारी या आयोग की जिम्मेदार पदाधिकारी हो।
सीपीआई और आदिवासी महासभा का संयुक्त रुख
सीपीआई के जिला परिषद् सदस्यों ने अखिल भारतीय आदिवासी महासभा, कोण्डागांव के साथ मिलकर पीड़ित परिवारों से संपर्क साधने का निर्णय लिया है। दोनों संगठनों ने कहा कि वे जल्द ही हिंदू संगठन की महिला के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने हेतु आवेदन प्रस्तुत करेंगे।
गंभीर सवाल खड़े करती है पुलिस की भूमिका
सीपीआई नेताओं ने कहा कि पुलिस की मौजूदगी में आदिवासी युवक-युवतियों के साथ जिस तरह दुर्व्यवहार हुआ, और बिना किसी वैधानिक अधिकार के उनके निजी सामान की तलाशी ली गई, वह निंदनीय और असंवैधानिक है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि पुलिस को मानव तस्करी जैसी गंभीर आशंका थी, तो जांच प्रक्रिया का संचालन केवल अधिकृत अधिकारी को करना चाहिए था, न कि किसी संगठन से जुड़ी महिला को।
न्यायिक हिरासत पर भी उठे सवाल
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि पुलिस ने बिना ठोस आधार और प्राथमिक जांच के, नन्स के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह कदम प्रथम दृष्ट्या न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होता है।
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