Ghansyam Sharma / Tue, Jul 1, 2025 / Post views : 158
रायपुर/ बिलासपुर। पत्रिका लुक
छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्राचार्य पदोन्नति का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। प्रदेश में पिछले 12 वर्षों से लंबित इस पदोन्नति प्रक्रिया पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में जारी स्टे को 1 जुलाई 2025 को माननीय हाईकोर्ट बिलासपुर की डिवीजन बेंच ने हटा दिया है। इस निर्णय के साथ ही प्राचार्य पदोन्नति को लेकर दायर सभी याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं, जिससे अब विभागीय स्तर पर पदोन्नति प्रक्रिया निर्बाध रूप से आगे बढ़ाई जा सकती है।
इस संबंध में "छत्तीसगढ़ राज्य प्राचार्य पदोन्नति संघर्ष मोर्चा", "छत्तीसगढ़ राज्य सर्वशासकीय सेवक अधिकारी-कर्मचारी पदोन्नति संघर्ष मोर्चा", एवं सहयोगी संगठन "छत्तीसगढ़ प्रगतिशील एवं नवाचारी शिक्षक महासंघ (CGPITF)" द्वारा लंबे समय से संघर्ष किया जा रहा था। इस संघर्ष के नेतृत्वकर्ता प्रदेश संयोजक सतीश प्रकाश सिंह ने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए, राज्य शासन, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, तथा संचालक लोक शिक्षण संचालनालय से मांग की है कि अब जबकि कानूनी अड़चनें समाप्त हो चुकी हैं, तो 15 जुलाई 2025 तक "टी एवं ई संवर्ग" में प्राचार्य के रिक्त सभी पदों पर पदस्थापना आदेश जारी किए जाएं।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
प्रदेश में हजारों व्याख्याताओं और प्रधान पाठकों को बीते वर्षों में प्राचार्य पदोन्नति से वंचित रहना पड़ा। कई वरिष्ठ शिक्षकों ने बिना प्राचार्य बने ही सेवानिवृत्ति प्राप्त कर ली। मोर्चा के संयोजक सतीश सिंह का कहना है कि हर माह 150 से 200 वरिष्ठ व्याख्याता/प्रधान पाठक बिना पदोन्नति के रिटायर हो रहे हैं। यह शिक्षा विभाग की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
संघर्ष मोर्चा द्वारा इस विषय पर राज्य के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, विभिन्न मंत्रियों, विधायकों, और वरिष्ठ अधिकारियों से कई बार मुलाकात एवं ज्ञापन सौंपे गए। अंततः यह प्रयास रंग लाए और उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि पदोन्नति प्रक्रिया अब रोकी नहीं जा सकती।
मांगें:
1. 15 जुलाई 2025 तक सभी प्राचार्य रिक्तियों के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया पूर्ण की जाए।
2. 30 अप्रैल 2025 को जारी पदोन्नति आदेश सूची में जो अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उनके स्थान पर प्रतीक्षा सूची से वरिष्ठ पात्र अधिकारियों को शामिल किया जाए।
3. काउंसलिंग प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध हो ताकि शिक्षक-प्रशासकीय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जा सके।
प्राचार्य पदोन्नति का महत्व
प्रदेश भर में सैकड़ों स्कूलों में स्थायी प्राचार्य नहीं हैं, जिससे प्रशासनिक गतिविधियों और शैक्षणिक गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है। यदि समय पर पदस्थापना नहीं हुई, तो आगामी शैक्षणिक सत्र भी प्रभावित होगा। पूर्णकालिक प्राचार्य की नियुक्ति से विद्यालयों में शैक्षिक अनुशासन, परिणाम, और नीतिगत कार्यों में तीव्रता आएगी।
प्रदेश संयोजक सतीश प्रकाश सिंह ने शासन को चेताया कि यदि निर्धारित समयसीमा में प्रक्रिया पूर्ण नहीं होती, तो मोर्चा को पुनः आंदोलनात्मक रुख अपनाना पड़ सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब जब कोई कानूनी बाधा नहीं, तो देर केवल प्रशासनिक इच्छाशक्ति की है।
सोत्र-satish singh pradesh sanyojak
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