Ghansyam Sharma / Fri, Sep 26, 2025 / Post views : 166
बिल के लाखों का भुगतान — अधिकारी–कर्मचारी पर मिलीभगत से हुआ कारनामा
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
नगर पालिका कोंडागांव में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें बिना कार्य प्रमाण और बिल संलग्न किए मेसर्स श्रीदिती इंटरप्राईजेस को ₹2,50,336 का भुगतान किया गया। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों में यह तथ्य स्पष्ट हुआ कि भुगतान हेतु प्रस्तुत नस्ती में लिखा था कि “भावगणना, बिल संलग्न नहीं है”, फिर भी भुगतान आदेश जारी कर चेक जारी कर दिया गया।
अध्यक्ष निधि से नगर पालिका द्वारा पाईपलाइन विस्तार कार्य के लिए कार्यादेश जारी किया गया था। लेकिन जांच में यह पाया गया कि नस्ती में कार्य पूर्णता के प्रमाण के साथ बिल या भावगणना संलग्न नहीं थे। इसके बावजूद भुगतान नोट शीट में फर्जी प्रविष्टि कर अधिकारियों ने भुगतान को स्वीकृति प्रदान कर दी। इस मामले से नगर पालिका में सरकारी निधियों के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की संभावना गहरी होती है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले को गंभीर मानते हुए जिला प्रशासन और लोकायुक्त कार्यालय से तत्काल जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल एक वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि सरकारी प्रणाली में विश्वास को चोट पहुँचाने वाला मामला है। यदि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में ऐसे भ्रष्टाचार की घटनाओं में इजाफा होने की आशंका है।
अनियमितताओं के प्रमुख तथ्य:
बिना कार्य प्रमाण भुगतान: भुगतान दस्तावेज़ में यह स्पष्ट नहीं था कि पाईपलाइन का कार्य पूर्ण रूप से हुआ या नहीं।
बिल संलग्न नहीं: भुगतान हेतु नस्ती में बिल और भावगणना संलग्न नहीं थे।
फर्जी प्रविष्टि: भुगतान स्वीकृति नोट शीट में कार्य पूर्णता का झूठा प्रमाण दिया गया।
अधिकारियों की मिलीभगत: उपअभियंता, सहायक अभियंता और वित्तीय विभाग के कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग कर भुगतान प्रक्रिया में शामिल रहे।
संबंधित कानून:
भारतीय दंड संहिता (IPC) — धारा 409 (गैरकानूनी लाभ व विश्वास का दुरुपयोग), धारा 420 (धोखाधड़ी)।
भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम — सरकारी अधिकारी द्वारा भ्रष्टाचार और पद का दुरुपयोग।
सार्वजनिक निधियों के भुगतान के लिए प्रमाणिक बिल और कार्य पूर्णता का सत्यापन अनिवार्य है।
जिम्मेदार व्यक्ति:
उपअभियंता / सहायक अभियंता / नगर पालिका के संबंधित अधिकारी जिन्होंने भुगतान स्वीकृत किया।
भुगतान प्रक्रिया में शामिल कर्मचारी जिन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
मांग:
स्थानीय नागरिक संगठन और सामाजिक संगठन जिला प्रशासन व लोकायुक्त से मांग कर रहे हैं कि दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए और नगर पालिका में भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
निष्कर्ष:
यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं है, बल्कि सरकारी प्रणाली पर विश्वास को चोट पहुँचाने वाला है। यदि इस पर समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में ऐसे भ्रष्टाचार के मामलों में वृद्धि होना तय है।
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