Ghansyam Sharma / Sat, Feb 7, 2026 / Post views : 215
जगदलपुर। पत्रिका लुक
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आज सुबह बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचीं, जहाँ उन्होंने संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम–2026 का शुभारंभ किया। उन्होंने बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के जयघोष के साथ अपने उद्बोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि आदिवासी संस्कृति में ही छत्तीसगढ़ की आत्मा बसती है। बस्तर पंडुम जैसे आयोजन जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और विरासतों को संरक्षित करने का सशक्त माध्यम हैं और यह आदिवासी समाज की गौरवशाली पहचान का जीवंत प्रतिबिंब है।
जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी कलाकार और जनसमूह उपस्थित रहा। राष्ट्रपति ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज के उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। पीएम जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव उत्कर्ष अभियान और नियद नेल्ला नार जैसी योजनाओं के माध्यम से आदिवासी समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए समाज और अभिभावकों से आगे आने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर लोग मुख्यधारा में लौट रहे हैं। वर्षों से बंद विद्यालय फिर से खुल रहे हैं, दुर्गम क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँच रही हैं। भय और अविश्वास का वातावरण समाप्त हो रहा है और बस्तर में विकास का नया सूर्योदय हो रहा है।
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि बस्तर पंडुम कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव है। लोकनृत्य, लोकगीत, वेशभूषा, आभूषण, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक व्यंजन बस्तर की समृद्ध संस्कृति को दर्शाते हैं। ऐसे आयोजन कलाकारों को पहचान, सम्मान और आजीविका प्रदान करते हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर पंडुम जनजातीय समाज के जीवन, आस्था और संस्कृति का जीवंत उत्सव है। उन्होंने कहा कि अब बस्तर में डर की जगह भरोसे और हिंसा की जगह विकास ने ले ली है। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इस सकारात्मक बदलाव के प्रतीक हैं।
कार्यक्रम में लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन हुआ तथा कोण्डागांव और बास्तानार के कलाकारों ने आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं। बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, कलाकार और नागरिक उपस्थित रहे।
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