Ghansyam Sharma / Tue, Aug 19, 2025 / Post views : 168
कोंडागांव/केशकाल। पत्रिका लुक
केशकाल थाना क्षेत्र के ग्राम नालाझर जंगल में हुई कथित मुठभेड़ को कांग्रेस ने पूरी तरह फर्जी करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा गठित जांच दल मंगलवार को घटनास्थल पहुँचा और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। इसके बाद केशकाल के पंचवटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
लखेश्वर बघेल का बड़ा बयान
बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि बस्तर में होने वाली ज्यादातर मुठभेड़ फर्जी होती हैं। पुलिस और सरकार आदिवासियों को नक्सली बताकर उनके साथ अन्याय कर रही है। उन्होंने कहा - नालाझर की घटना में चार निर्दोष युवक केवल शिकार करने गए थे। बारिश होने पर जब वे लौट रहे थे तो पुलिस वाहन देखकर डर के मारे जंगल में छिप गए। लेकिन पुलिस ने झूठी कहानी गढ़ दी और उन्हें नक्सली बताकर मुठभेड़ का नाम दे दिया। यह सरकार की सोची-समझी साजिश है, जिससे आदिवासी युवाओं को दमन कर दबाया जा सके। बघेल ने मांग की कि घायल युवक के परिजन को 1 करोड़ रुपये मुआवजा व एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि न्याय नहीं मिला तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी। 
सावित्री मंडावी का बड़ा बयान
भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मंडावी ने भाजपा सरकार पर आदिवासियों के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा -जब से भाजपा की सरकार बनी है, भोले-भाले आदिवासियों को नक्सली बताकर मारने की घटनाएँ लगातार बढ़ी हैं। बीजापुर में निर्दोष रसोइयों को नक्सली बताकर मारा गया, कई गांवों में ग्रामीणों पर गोलियां चलाई गईं। गांव वाले बार-बार कहते रहे कि हम ग्रामीण हैं, फिर भी पुलिस ने फायरिंग की। नालाझर की घटना भी उसी कड़ी का हिस्सा है, जहाँ एक पढ़ने वाला अभय और अन्य साथी केवल शिकार करने गए थे। लेकिन उन्हें नक्सली घोषित कर फर्जी मुठभेड़ में गोली लगने से घायल हो गया।
उन्होंने कहा कि हमें खुशी थी कि आदिवासी मुख्यमंत्री बने हैं, लेकिन आज बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आदिवासियों को न्याय नहीं मिल रहा। उन्होंने सरकार से तत्काल मुआवजा, नौकरी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
पूर्व मंत्री एवं जांच समिति संयोजक मोहन मरकाम ने कहा कि नालाझर जंगल में कोई मुठभेड़ नहीं हुआ। घायल युवक अभय नेताम और उसके साथियों ने स्पष्ट बताया कि वे शिकार से लौट रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें नक्सली कहकर गोली चलाई। सरकार कहती है बस्तर नक्सलमुक्त है, जबकि पुलिस मुठभेड़ की कहानी गढ़ती है—सच कौन कह रहा है? यह घटना निर्दोष आदिवासियों पर अत्याचार और पुलिस की मनमानी का प्रमाण है। प्रमोशन व वाहवाही के लिए फर्जी मुठभेड़ दिखाना शर्मनाक है। हमारी मांग है कि अभय को बेहतर इलाज मिले, परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा और नौकरी दी जाए। दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
इस दौरान केशकाल विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक संतराम नेताम, पीसीसी महामंत्री रवि घोष, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष देवचंद मतलाम, कोंडागांव कांग्रेस जिलाध्यक्ष बुधराम नेताम शामिल।
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