Ghansyam Sharma / Fri, Oct 17, 2025 / Post views : 208
रायपुर। पत्रिका लुक (भावेश जैन)
राज्य शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति और शांति, संवाद एवं विकास पर केंद्रित सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप बस्तर संभाग में नक्सल विरोधी मुहिम को ऐतिहासिक सफलता मिली है। ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ कार्यक्रम के तहत दण्डकारण्य क्षेत्र के 210 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। यह आत्मसमर्पण विश्वास, सुरक्षा और विकास की दिशा में बस्तर की नई सुबह का संकेत है।
लंबे समय से नक्सली गतिविधियों से प्रभावित अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर क्षेत्र में यह ऐतिहासिक घटनाक्रम नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा अपनाई गई व्यापक नीति ने क्षेत्र में स्थायी शांति की नींव रखी है। पुलिस, सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों और नागरिकों के समन्वित प्रयासों से हिंसा की संस्कृति को संवाद और विकास की संस्कृति में परिवर्तित किया जा सका है।
यह पहली बार है जब नक्सल विरोधी अभियान में इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ माओवादी कैडरों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार डीकेएसजेडसी सदस्य, 21 डिविजनल कमेटी सदस्य सहित अनेक वरिष्ठ नेता शामिल हैं। इन कैडरों ने 153 अत्याधुनिक हथियार — जिनमें AK-47, SLR, INSAS रायफल और LMG शामिल हैं — समर्पित किए हैं। यह केवल हथियारों का नहीं, बल्कि हिंसा और भय के युग का अंत और भरोसे के युग की शुरुआत का प्रतीक है।
मुख्यधारा में लौटने वालों में सीसीएम रूपेश उर्फ सतीश, भास्कर उर्फ राजमन मांडवी, रनीता, राजू सलाम, धन्नू वेत्ती उर्फ संतू और रतन एलम जैसे इनामी कैडर शामिल हैं। जगदलपुर पुलिस लाइन परिसर में आयोजित समारोह में इन सभी का स्वागत पारंपरिक मांझी-चालकी विधि से किया गया। आत्मसमर्पित माओवादियों को संविधान की प्रति और लाल गुलाब भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीजीपी अरुण देव गौतम ने कहा, “पूना मारगेम केवल नक्सलवाद से दूरी बनाने का प्रयास नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने का अवसर है। जो आज लौटे हैं, वे बस्तर में शांति और विकास के दूत बनेंगे।” कार्यक्रम में एडीजी विवेकानंद सिन्हा, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी., कलेक्टर हरिस एस. सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी आत्मसमर्पित कैडरों ने संविधान की शपथ ली और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताया। ‘वंदे मातरम्’ की गूंज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ — यह क्षण बस्तर में विश्वास, विकास और शांति के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन गया।
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