Ghansyam Sharma / Mon, Jul 7, 2025 / Post views : 164
कोंडागांव। पत्रिका लुक
जिले में खेती-किसानी के चरम सीजन के बीच सहकारी समितियों द्वारा वितरित उर्वरकों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रयोगशाला परीक्षण में खाद के सैंपल अमानक पाए जाने के बाद किसान न केवल असमंजस में हैं, बल्कि उन्हें आर्थिक नुकसान की आशंका भी सताने लगी है।
जानकारी के अनुसार, सहकारी समितियों से किसानों को ऋण के साथ-साथ खाद और बीज उपलब्ध कराए जाते हैं। लेकिन वर्तमान में समितियों में खाद की कमी के चलते किसानों को निजी दुकानों से ऊंचे दामों पर खाद खरीदना पड़ रहा है। वहीं अब यह भी चिंता का विषय बन गया है कि कहीं वह खाद भी मानकों के अनुरूप न हो।
प्रारंभिक जांच में मार्कफेड से खरीदे गए खाद के सैंपल प्रयोगशाला में अमानक हो गए हैं। यह उर्वरक जिले के डीएमओ के अधीन गोदामों से सहकारी समितियों तक पहुंचाई गई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे जिले में एक ही स्रोत से खाद वितरण हुआ, फिर भी केवल दो समितियों में वितरण पर रोक लगाना अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है।
उर्वरक निरीक्षक आनंद नेताम ने पुष्टि करते हुए बताया कि असफल सैंपलों को सेंट्रल लैब भेजा गया है, और संबंधित समितियों को खाद वितरण पर रोक के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, जिन किसानों को अमानक खाद वितरित की गई, उनकी सूची भी मांगी गई है।
इस पूरे मामले में किसानों की चिंता दोहरी हो गई है। एक ओर जहां सरकारी समिति से वितरित खाद फेल हो चुका है, वहीं निजी दुकानों से ऊंची कीमत पर खरीदे जा रहे उर्वरकों की गुणवत्ता पर भी भरोसा नहीं रहा। विभागीय अधिकारी निजी दुकानों से बेचे जा रहे खाद को "मानक" बता रहे हैं, लेकिन जब सरकारी गोदाम का खाद अमानक निकला, तो उनके दावों पर भरोसा करना किसानों के लिए मुश्किल हो गया है।
भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी नेता ने कहा
भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी कोण्डागांव जिला सचिव शैलेश शुक्ला ने इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यदि उर्वरक की गुणवत्ता से फसल प्रभावित होगी तो इसका नुकसान किसानों को भुगतना पड़ेगा, जिसका जिम्मेदार कौन होगा?
जिले में एक ही गोदाम व एक कंपनी का उर्वरक वितरण हुआ, फिर मात्र दो समितियों में वितरण पर रोक लगाना अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कहि ऐसा तो नहीं अधिकारियों की मिलीभगत से इस खेल को अंजाम दिया जा रहा है। सभी समितियों से वितरित उर्वरक की तत्काल गुणवत्ता जांच हो,
दोषी संस्थानों व लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए । किसानों को आर्थिक क्षति की भरपाई की गारंटी दी जाए।
यह मामला अब सिर्फ अमानक खाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही का भी विषय बन गया है।
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