Ghansyam Sharma / Fri, Jun 27, 2025 / Post views : 189
कोण्डागांव | पत्रिका लुक
जिले के सखी वन स्टॉप सेंटर से एक नाबालिग बालिका के फरार होने की घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह मामला तब और गंभीर हो गया, जब पीड़ित पिता प्रेम प्रकाश उपाध्याय अपनी बेटी की बरामदगी और सेंटर की लापरवाही के विरोध में हाईवे पर न्याय के लिए बैठ गए । उन्होंने रात को कोण्डागांव के मुख्य चौक और सखी सेंटर के बाहर धरना प्रदर्शन कर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निष्क्रियता के खिलाफ आवाज बुलंद की।
गायब बेटी को रायपुर से लाकर सखी सेंटर में रखा गया था
प्रेम प्रकाश उपाध्याय की नाबालिग बेटी कुछ दिनों पहले लापता हो गई थी। उन्होंने तत्काल इसकी शिकायत कोण्डागांव थाने में दर्ज कराई थी। 25 जून की रात पुलिस को वह बालिका रायपुर में मिली, जिसके बाद उसे देर रात कोण्डागांव लाया गया।
चूंकि उस समय रात के लगभग 2:00 बज चुके थे, इसलिए पुलिस ने बालिका को सखी वन स्टॉप सेंटर में महिला संरक्षण के लिए अस्थायी रूप से रात भर के लिए ठहराया। पिता ने उसी रात बेटी को अपने साथ ले जाने की अनुमति मांगी, लेकिन सेंटर ने सुबह तक इंतजार करने को कहा।
सुबह पहुंचा पिता, बेटी लापता निकली
अगली सुबह जब प्रेम प्रकाश अपनी बेटी को लेने पहुंचे, तो वहां उन्हें चौंकाने वाली जानकारी दी गई — बालिका सेंटर से फरार हो गई है।
यह सुनते ही पिता का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पहले NH-30 पर स्थित मुख्य चौक पर तख्ती लेकर धरना दिया और फिर रात में सखी सेंटर के सामने सड़क पर बैठ गए।
गंभीर लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना बयान
मामला जब मीडिया की नजर में आया, तो पत्रकारों ने जिला महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी (DPO) अवनी विश्वाल से घटना पर प्रतिक्रिया मांगी। उनका जवाब न केवल संवेदनहीन था, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा भी लगा।
डीपीओ ने कहा:
यह कोई जेल नहीं है कि हम किसी को बांधकर रखें। लड़की खुद चली गई है। पुलिस ने रात दो बजे लड़की को सेंटर में छोड़ा था। वह सुबह नहाने के बाद फरार हो गई। वह पहले से किसी लड़के के साथ बाहर जाना चाह रही थी, कपड़े रखे थे। हमने थाने को सूचना दे दी है, अब आगे की जिम्मेदारी पुलिस की है।
उन्होंने आगे कहा:
हमारे पास गार्ड और स्टाफ मौजूद थे, फिर भी लड़की पीछे की दीवार फांदकर भाग गई। लेकिन जब कोई स्वेच्छा से भागता है, तो उसे रोकना संभव नहीं होता। सेंटर जेलखाना नहीं है।
उनके इन बयानों ने न केवल पीड़ित पिता की पीड़ा को और बढ़ाया, बल्कि आम जनता में भी आक्रोश पैदा किया।
सवालों के घेरे में सखी सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था
इस घटना ने बाल संरक्षण और पुनर्वास व्यवस्था की पोल खोल दी है। जब एक रेस्क्यू की गई नाबालिग सरकारी संरक्षण में रहते हुए फरार हो सकती है, तो यह सोचने पर मजबूर करता है कि इन केंद्रों की निगरानी व्यवस्था कितनी लचर है।
प्रश्न यह भी उठता है कि अगर एक संवेदनशील केस की बालिका के लिए सेंटर में पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम नहीं थे, तो सामान्य मामलों में क्या हाल होगा?
प्रशासन हरकत में आया, SDM पहुंचे जांच में
मामला जैसे-जैसे तूल पकड़ता गया, जिला प्रशासन हरकत में आया। देर शाम को उप जिलाधिकारी (SDM) अजय उरांव सखी सेंटर पहुंचे और उन्होंने सेंटर परिसर का निरीक्षण किया।
उन्होंने मीडिया से कहा:
हमें शिकायत मिली है, जिसके आधार पर संयुक्त जांच टीम बनाई गई है। पूरे मामले की बारीकी से जांच की जाएगी। यदि कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित पिता का दर्द: अगर रात में बेटी दे दी जाती तो यह नहीं होता
धरने पर बैठे प्रेम प्रकाश उपाध्याय ने मीडिया से बात करते हुए कहा:
मैं रात में ही अपनी बेटी को ले जाने आया था, लेकिन मुझे कहा गया कि सुबह आना। अगर मेरी बच्ची मुझे रात में दे दी जाती, तो आज वह मुझसे बिछड़कर कहीं ओर नहीं जाती।
वे अब भी प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि उनकी बेटी को जल्द से जल्द ढूंढा जाए और सखी सेंटर के जिम्मेदार कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
आगे की कार्रवाई और जनचेतना की जरूरत
यह मामला केवल एक पिता की बेटी को लेकर चिंता नहीं है, यह उन तमाम अभिभावकों और समाज की महिलाओं-बालिकाओं की सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है।
सरकार की ओर से महिला संरक्षण, पुनर्वास और सुरक्षा के नाम पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन अगर ऐसी लापरवाहियां सामने आती हैं, तो ये योजनाएं कागजों तक ही सिमट कर रह जाएंगी।
कुल मिलाकर
यह घटना उस व्यवस्था पर करारा तमाचा है, जो महिला सुरक्षा की बड़ी-बड़ी बातें तो करती है, लेकिन जब जिम्मेदारी निभाने की बारी आती है, तो हाथ खड़े कर देती है।
यदि इस मामले में जल्द और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे सखी सेंटर जैसे संस्थानों की साख और शासन-प्रशासन की विश्वसनीयता पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।
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