Ghansyam Sharma / Tue, Mar 24, 2026 / Post views : 257
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
जिले के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम कुदुर से तुमडीवाल मार्ग पर प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित डामरीकरण सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निर्माण के महज एक महीने के भीतर ही सड़क जगह-जगह से उखड़ने लगी है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।
विभागीय जानकारी के अनुसार, ग्राम कुदुर से तुमडीवाल मार्ग पर निर्मित इस सड़क के निर्माण कार्य का दायित्व ठेकेदार धर्मेंद्र मिश्रा को सौंपा गया था।
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क का डामर इतना कमजोर है कि उसे हाथ और पैर से मसलने पर ही निकल जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के दौरान निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि डामर बिछाने से पहले नीचे गिट्टी (मेटल) नहीं डाली गई और सीधे मिट्टी पर ही डामर डाल दिया गया, जिससे सड़क बेहद कमजोर हो गई।
ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही भी कम है, इसके बावजूद सड़क का इतनी जल्दी खराब होना निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने ठेकेदार धर्मेंद्र मिश्रा पर घटिया सामग्री के उपयोग का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कोण्डागांव जिला भले ही नक्सल मुक्त हो गया हो, लेकिन विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर अब भी लापरवाही बरती जा रही है। उनका आरोप है कि ठेकेदारों द्वारा लगातार गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से घटिया निर्माण को अंजाम दिया जा रहा है।


इसके साथ ही ग्रामीणों ने निगरानी में भी ढिलाई का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने का हवाला देकर निरीक्षण में कमी रखी गई, जिसका फायदा उठाकर निम्न स्तर का निर्माण किया गया।
करीब 4 किलोमीटर लंबी यह सड़क बनने के कुछ ही समय बाद पपड़ी की तरह उखड़ने लगी है, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है।
बलराम ठाकुर ईई (PMGSY) का बयान
PMGSY के कार्यपालन अभियंता (ईई) ने बताया कि कुदुर से तुमड़ीवार मार्ग बहुत पुराना है, जिसका सर्वे वर्ष 2016-17 में किया गया था। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण उस समय कार्य को रोक दिया गया था। हाल ही में जिला प्रशासन के सहयोग से इस सड़क का निर्माण कराया गया है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 4.5 किलोमीटर है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने अभी सड़क की वर्तमान स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण नहीं किया है। हालांकि गिट्टी बिछाने के दौरान वे मौके पर गए थे। उनका कहना है कि डामरीकरण के बाद सड़क को पूरी तरह जमने में कुछ समय लगता है। इसके बावजूद वे मामले को दिखवाने और आवश्यक जांच कराने की बात कही है।
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