Ghansyam Sharma / Fri, Jul 18, 2025 / Post views : 204
प्राचार्य पदोन्नति पर लगे क़ानूनी मामले का शीघ्र निराकरण कर 30 जुलाई से पूर्व पदस्थापना आदेश जारी करने की मांग
प्राचार्य पदोन्नति संघर्ष मोर्चा ने की त्वरित पहल की अपील
बिलासपुर। पत्रिका लुक
छत्तीसगढ़ राज्य प्राचार्य पदोन्नति संघर्ष मोर्चा, सर्वशासकीय सेवक पदोन्नति संघर्ष मोर्चा तथा छत्तीसगढ़ प्रगतिशील एवं नवाचारी शिक्षक महासंघ (CGPITF) ने स्कूल शिक्षा विभाग में पिछले 12 वर्षों से लंबित प्राचार्य पदोन्नति प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण कराने की मांग शासन से की है।
प्रदेश संयोजक सतीश प्रकाश सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट बिलासपुर के डिवीजन बेंच ने 1 जुलाई 2025 को प्राचार्य पदोन्नति पर लगी रोक हटाते हुए कई याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जिससे इस प्रक्रिया का रास्ता साफ हुआ। हालांकि हाईकोर्ट के सिंगल बेंच में प्राचार्य पदोन्नति से संबंधित एक याचिका पर अभी भी स्थगन आदेश जारी है। उक्त मामले की सुनवाई 23 जुलाई 2025 को निर्धारित है।
उन्होंने शासन, स्कूल शिक्षा सचिव एवं लोक शिक्षण संचालनालय से अपील की है कि हाईकोर्ट में लंबित इस मामले का विधिसम्मत समाधान कर 30 जुलाई 2025 से पूर्व "टी एवं ई संवर्ग" में रिक्त प्राचार्य पदों पर काउंसलिंग प्रक्रिया पूर्ण कर नियुक्ति आदेश जारी किए जाएं।
सिंह ने कहा कि विभाग में 35-40 वर्षों की सेवा के बाद भी वरिष्ठ व्याख्यातागण व प्रधान पाठक बिना पदोन्नति के रिटायर हो रहे हैं, जो अत्यंत पीड़ादायक है। हर माह औसतन 150-200 शिक्षक रिटायर हो रहे हैं, जिससे न केवल उनके सेवाकाल का समुचित सम्मान नहीं हो पा रहा, बल्कि विद्यालयों में भी नेतृत्व का संकट बना हुआ है।
उन्होंने 30 अप्रैल 2025 को जारी की गई प्राचार्य पदोन्नति की सूची में वर्तमान में रिटायर्ड हो चुके शिक्षकों के स्थान पर प्रतीक्षा सूची के पात्र शिक्षकों को शामिल करने की मांग भी की है, जिससे पदोन्नति का लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिल सके।
संघर्ष मोर्चा ने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन की ओर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्रिमंडल के सदस्यों, विधायकगणों, शिक्षा सचिव एवं अन्य अधिकारियों से कई बार मिलकर ज्ञापन सौंपा गया है। यह उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि न्यायालय द्वारा पदोन्नति की राह कुछ हद तक साफ की गई है।
प्रदेश संयोजक सतीश प्रकाश सिंह ने यह भी कहा कि यदि 30 जुलाई 2025 तक काउंसलिंग की प्रक्रिया पूर्ण कर पदस्थापना आदेश जारी कर दिए जाते हैं, तो 31 जुलाई को रिटायर हो रहे कई वरिष्ठ शिक्षकों को उनके अंतिम सेवाकाल में प्राचार्य पद की गरिमा मिल सकेगी। इससे न केवल उनके सम्मान में वृद्धि होगी, बल्कि विद्यालयों को पूर्णकालिक नेतृत्व भी मिलेगा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
अंततः मोर्चा ने मांग की है कि न्यायालय के निर्णय के तुरंत बाद शासन द्वारा बिना देरी किए काउंसलिंग की तिथि घोषित कर समस्त प्रक्रिया निष्पक्षता से पूर्ण की जाए तथा सभी रिक्त प्राचार्य पदों पर तत्काल पदस्थापना की जाए।
सोत्रsatushprkassingh
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