Ghansyam Sharma / Thu, Jul 24, 2025 / Post views : 207
कोण्डागांव । पत्रिका लुक ( विशेष लेख-✍️
आज के दौर में जहां तकनीक, सूचना और कानून की पहुँच हर आम नागरिक तक पहुंच चुकी है, वहीं दूसरी ओर ठगी के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। यह चौंकाने वाली सच्चाई है कि ठग अब केवल आम लोगों को ही नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों और नेताओं को भी अपना निशाना बना रहे हैं। ताज़ा मामला कोण्डागांव जिले के केशकाल से सामने आया है, जहां एक वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व जिला अध्यक्ष को खनिज निगम का अध्यक्ष बनाने का झांसा देकर 41 लाख रुपये की ठगी कर ली गई।
यह घटना न केवल राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि जब जागरूक और सत्ता से जुड़े लोग भी लालच के जाल में फंस जाते हैं, तो आम नागरिकों की स्थिति क्या होगी?
यह कोई पहला मामला नहीं है। पहले भी ठगों ने नौकरी दिलाने, योजना का लाभ दिलवाने, लॉटरी या इनाम जिताने, या फिर ऊँचे पदों का प्रलोभन देकर आम लोगों से लाखों की ठगी की है। कुछ मामलों में पीड़ित हिम्मत जुटाकर पुलिस में शिकायत करते हैं, लेकिन कई लोग शर्म, डर या सामाजिक बदनामी के डर से चुप रह जाते हैं।
पुलिस और प्रशासन समय-समय पर जनजागरूकता अभियान चलाते हैं। मीडिया, सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से भी लगातार चेताया जाता है कि किसी भी लालच या लोभ में न आएं, बिना जांच-परख के कोई निर्णय न लें। पुलिस द्वारा साइबर जागरूकता अभियान, ठगों के नए तरीकों की जानकारी और हेल्पलाइन नंबरों का प्रचार-प्रसार भी किया जाता है।
इसके बावजूद, आम हो या खास—लोग बार-बार ठगी का शिकार हो रहे हैं। सवाल उठता है कि आखिर क्या वजह है कि इतनी चेतावनियों और जागरूकता के बाद भी लोग ठगों के झांसे में आ जाते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि लालच और पद की आकांक्षा ऐसी कमजोरियां हैं, जिनका फायदा ठग आसानी से उठा लेते हैं। जब व्यक्ति को बिना मेहनत या प्रक्रिया के कोई बड़ा पद, पैसा या फायदा मिलने की उम्मीद दिखाई जाती है, तो वह सहज रूप से उस जाल में फँस जाता है।
ऐसे में यह जरूरी है कि हम सभी न केवल खुद सजग रहें, बल्कि अपने आस-पास के लोगों को भी जागरूक करें। कोई भी बड़ा प्रस्ताव मिले तो उसकी पुष्टि करें, दस्तावेज़ मांगें, स्रोत की जांच करें और कानूनी राय लें।
यह भी जरूरी है कि ठगी का शिकार होने पर चुप न रहें—पुलिस में शिकायत करें, ताकि ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और बाकी लोग भी सतर्क हो सकें।
आज के दौर में एक सतर्क नागरिक ही सुरक्षित समाज की आधारशिला है। पद, पैसा या प्रतिष्ठा की चाह कभी-कभी ऐसी कीमत ले लेती है, जिसे चुकाना मुश्किल हो जाता है।
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