Ghansyam Sharma / Wed, Jul 30, 2025 / Post views : 183
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
जर्जर भवन में पढ़ रहे बच्चे, दो वर्षों से आवेदन पर कार्यवाही नहीं
जिला कोण्डागांव के ग्राम भतवा (ग्राम पंचायत मगेदा, तहसील माकड़ी) में संचालित शासकीय प्राथमिक शाला की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। अत्यंत जर्जर हो चुके इस भवन की मरम्मत के लिए ग्रामीणों ने लगभग दो वर्ष पूर्व विकास खंड शिक्षा अधिकारी माकड़ी को लिखित शिकायत दी थी, परंतु अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। इससे आक्रोशित आदिवासी जन 29 जुलाई को जिला कलेक्टर के जनदर्शन में पहुंचे और एक बार फिर लिखित आवेदन प्रस्तुत किया।
ग्रामीणों ने अपने आवेदन में गंभीर आरोप लगाया कि “शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मंशा है कि आदिवासी बच्चों को जानबूझकर जर्जर भवन में पढ़ाया जाए ताकि कभी भी हादसा हो और उनकी जान चली जाए, जिससे आदिवासियों की संख्या घटे।
छत गिरने की घटना ने बढ़ाई चिंता
आवेदकों ने बताया कि 4 अगस्त 2023 को विद्यालय भवन की छत का एक हिस्सा भरभरा कर गिर गया था। इस घटना के बाद 21 अगस्त 2023 को फिर से शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर तत्काल मरम्मत कराने का आग्रह किया गया था। लेकिन दो वर्ष बीतने के बावजूद भी भवन की मरम्मत नहीं हो सकी। इस लापरवाही से बच्चों की जान पर हर दिन खतरा मंडरा रहा है।
शेड में पढ़ाई करने को मजबूर
विद्यालय भवन की दीवारें और छत इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि अब बच्चों को भवन के बाहर बने अस्थायी शेड में पढ़ाई कराई जा रही है। टॉयलेट का दीवार भी गिर चुका है, जिससे स्वच्छता की स्थिति और भी खराब हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में बच्चों को खुले शेड में पढ़ाना और भी कठिन हो जाता है।
ग्रामीणों का आरोप — आदिवासी बच्चों के साथ भेदभाव
आवेदन में उल्लेख किया गया कि विद्यालय में अधिकांश विद्यार्थी आदिवासी समुदाय से आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इसी कारण अधिकारियों की उदासीनता बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि “यदि यह विद्यालय किसी अन्य वर्ग के बच्चों का होता तो अब तक मरम्मत हो चुकी होती।”
नाराजगी और आक्रोश
लगातार अनदेखी और लापरवाही से ग्रामीणों में गहरी नाराजगी और आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर शीघ्र ही भवन की मरम्मत नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
आवेदन करने वाले ग्रामीण
इस दौरान कलेक्टर कार्यालय पहुंचे प्रमुख आवेदकों में सुकलाल शोरी, दुर्जन मरकाम, तुलसी मरकाम, घसिया मरकाम, लखीराम नेताम, गीतेश नेताम और ओमप्रकाश शोरी शामिल थे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जर्जर भवन की मरम्मत अविलंब कराई जाए।
प्रशासन की चुप्पी
फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली है। लेकिन ग्रामीणों की आशंका है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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