Ghansyam Sharma / Sat, Jun 14, 2025 / Post views : 167
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
"रक्तदान से बड़ा कोई पुण्य नहीं" – यह कथन साकार कर रहे हैं कोण्डागांव निवासी किशोर शर्मा, जिन्होंने अब तक 68 बार रक्तदान कर हजारों जरूरतमंदों की जिंदगी बचाने में मदद की है। विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर हम आपके सामने ला रहे हैं एक ऐसे व्यक्ति की कहानी, जिनके जीवन में रक्तदान सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सेवा और संतोष का माध्यम बन गया है।
शर्मा बताते हैं कि यह सफर तब शुरू हुआ, जब वे बिलासपुर में 12वीं कक्षा के छात्र थे। एक दिन अपने दोस्त के परिवारजन को अस्पताल में देखने गए, जहां देखा कि लोग खून के लिए अस्पताल परिसर में इधर-उधर भटक रहे थे। जब उन्होंने कारण पूछा, तो बताया गया कि मरीज को तुरंत रक्त की जरूरत है, लेकिन कोई रक्तदाता नहीं मिल रहा।
उस क्षण किशोर और उनके दोस्त ने डॉक्टर से संपर्क किया और पहली बार रक्तदान किया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। किशोर शर्मा कहते हैं – "पहली बार रक्तदान करने के बाद जो आत्मसंतोष मिला, वही मेरी प्रेरणा बन गया। तब से अब तक हर संभव अवसर पर रक्तदान करता रहा हूं।"
आज किशोर शर्मा छत्तीसगढ़ ब्लड डोनर फाउंडेशन के सक्रिय सदस्य हैं और 2015 से लगातार इस सेवा से जुड़े हुए हैं। वे सिर्फ खुद रक्तदान नहीं करते, बल्कि हजारों लोगों को रक्तदाता से जोड़ने और जरूरतमंदों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने का कार्य भी कर चुके हैं।
फिलहाल एक निजी संस्थान में कार्यरत किशोर शर्मा के परिवार में उनकी मां, पत्नी और दो बच्चे हैं। शर्मा बताते हैं कि उनके परिवार का भी रक्तदान को लेकर हमेशा सकारात्मक सहयोग रहा है। उनके अनुसार – "परिवार का समर्थन न हो, तो समाज सेवा की राह मुश्किल होती है।"
उनका मानना है कि –
"पौधारोपण, रक्तदान और गौ सेवा – इन तीनों से बढ़कर कोई पुण्य का कार्य नहीं हो सकता।"
कुछ अहम बातें किशोर शर्मा के बारे में:
अब तक 68 बार रक्तदान
हजारों जरूरतमंदों को रक्त दिलाने में मदद
2015 से छत्तीसगढ़ ब्लड डोनर फाउंडेशन के सदस्य
परिवार और समाज से मिलता है सकारात्मक सहयोग
नियमित रक्तदान से शारीरिक-मानसिक संतुलन में भी होता है लाभ
विश्व रक्तदाता दिवस पर किशोर शर्मा जैसे रक्तदाताओं की कहानियाँ समाज को प्रेरित करती हैं कि रक्तदान केवल जीवनदान नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है।
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