Ghansyam Sharma / Fri, Nov 28, 2025 / Post views : 232
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
प्रदेश सरकार गौण खनिजों के अवैध उत्खनन पर भले ही सख्ती की बात कर रही हो, लेकिन कोंडागांव जिले में नारंगी नदी पर रेत माफिया बेखौफ सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर प्रदेश के कुछ जिलों में कार्रवाई तो हुई, पर नारंगी नदी की स्थिति बताती है कि यहां विभागीय कार्रवाई केवल कागजों में सिमटी हुई है।
शुक्रवार को ग्राम मसोरा के पास नदी में दो दर्जन से अधिक ट्रैक्टर रेत निकालते देखे गए। पत्रकारों के पहुंचते ही ट्रैक्टर चालक वाहन लेकर भाग खड़े हुए, जिससे साफ होता है कि खनन माफिया को पहले से सूचना रहती है या फिर कार्रवाई का कोई डर नहीं है।
ग्रामीण दलसिंह, डमरूराम सहित अन्य लोगों ने बताया कि रेत माफिया दिन–रात उत्खनन कर रहे हैं। अनियंत्रित खनन से नदी की गहराई–चौड़ाई बढ़ रही है, तट कटाव तेज हो गया है और उपजाऊ जमीन नष्ट हो रही है। किसानों का कहना है कि लगातार रेत निकासी से जलस्तर गिर रहा है, जिससे सिंचाई प्रभावित हो रही है और फसलें संकट में हैं।
क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली नारंगी नदी समय से पहले जल संकट की ओर बढ़ रही है। भारी वाहनों की आवाजाही और मशीनों के शोर ने नदी की प्राकृतिक धारा को बाधित कर दिया है। विशेषज्ञों की मानें तो मौजूदा स्थिति भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय असंतुलन और पेयजल संकट का संकेत दे रही है।
खनिज विभाग के अधिकारी अवैध खनन रोकने के दावे करते हैं, लेकिन हालात उनके दावों को झुठला रहे हैं। विभागीय उदासीनता और प्रशासन की चुप्पी ने माफियाओं को खुली छूट दे रखी है। शुक्रवार शाम जिला खनिज अधिकारी गौतम नेताम से बार-बार संपर्क करने की कोशिश की गई, पर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
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