Ghansyam Sharma / Sat, Aug 29, 2026 / Post views : 74
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
मर्दापाल तहसील क्षेत्र के किसानों, आदिवासी ग्रामीणों और आमजनों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर तहसीलदार मर्दापाल को राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
CPI छत्तीसगढ़ राज्य परिषद के निर्देश पर आयोजित कार्यक्रम में जिला सचिव शैलेष और सह सचिव दिनेश मरकाम के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। लक्ष्मण महावीर, बिसम्बर, सोमारू, दुबेश, मानसिंग, रामचंद, चंदर, फगनू सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर आवाज उठाई।
वनाधिकार पट्टा देने की मांग
CPI ने मांग की कि वन भूमि पर वर्ष 2005 से पूर्व से काबिज पात्र लोगों को वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत वनाधिकार पत्र दिया जाए। पार्टी ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण कई ग्रामीण वर्ष 2008 से 2025 के बीच आवेदन नहीं कर पाए। ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष समिति गठित कर पात्र हितग्राहियों को वनाधिकार का लाभ देने की मांग की गई।
स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा
ज्ञापन में मर्दापाल क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई। प्राथमिक स्कूलों में पांच, माध्यमिक स्कूलों में चार तथा हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की गई, ताकि ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्र के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
आश्रम, पुलिस और आंगनबाड़ी से जुड़ी मांगें
CPI ने मर्दापाल एवं हसलनार में संचालित कन्या एवं बालिका आश्रम को इसी सत्र से ग्राम कड़ेनार में संचालित करने की मांग की। साथ ही कोण्डागांव जिले के राजस्व गांवों को नारायणपुर पुलिस थानों के बजाय कोण्डागांव पुलिस से जोड़ने की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की गई। बिना भवन संचालित हो रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए जल्द भवन निर्माण कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
सड़क निर्माण में तेजी की मांग
मर्दापाल-हडेली से कड़ेनार तक लंबे समय से निर्माणाधीन सड़क का कार्य जल्द पूरा कराने की मांग की गई। CPI ने निर्धारित समय में कार्य पूरा नहीं करने वाले ठेकेदार और संबंधित निर्माण एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।
पार्टी नेताओं ने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर लगातार शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो जनसमर्थन के साथ आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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