Ghansyam Sharma / Thu, Feb 12, 2026 / Post views : 193
आदिवासी बहुल बस्तर में श्रमिक शोषण की आशंका, पुराने कानूनों को रखने की वकालत
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
केंद्र सरकार की ओर से 44 श्रम कानूनों को चार श्रम संहिता में तब्दील किए जाने के फैसले के खिलाफ देशव्यापी मजदूर आंदोलन के तहत आज 12 फरवरी को घोषित हड़ताल को कोण्डागांव जिले में व्यापक समर्थन मिला है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) की जिला परिषद् ने न सिर्फ इस हड़ताल का समर्थन किया, बल्कि महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक विस्तृत ज्ञापन जिला कलेक्टर कार्यालय में सौंपकर प्रशासन को श्रमिकों की पीड़ा से अवगत कराया।
श्रम संहिता: चार कानूनों में समाए 44 अधिनियम
ज्ञापन सौंपने के दौरान सीपीआई जिला सचिव शैलेश ने कहा कि वर्ष 2019-20 में संसद से पारित चार श्रम संहिताएं—वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यवसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थितियां संहिता—असल में मजदूर विरोधी कानून हैं। इनके माध्यम से संगठित क्षेत्र की तुलना में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को कानूनी संरक्षण से वंचित किया जा रहा है।
बस्तर की पीड़ा: अशिक्षा और शोषण का त्रासदीपूर्ण समीकरण
ज्ञापन में विशेष रूप से बस्तर संभाग की दुर्दशा का जिक्र किया गया। सीपीआई पदाधिकारियों ने कहा कि कोण्डागांव जैसे आदिवासी बहुल जिले में साक्षरता दर अभी भी राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है। यहां की अधिकांश आबादी अशिक्षित या अर्धशिक्षित है। पूर्व के श्रम कानूनों के बावजूद यहां मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, कार्य के घंटे, बोनस, पीएफ, ईएसआई जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जाता है। ऐसे में यदि 44 कानूनों के स्थान पर केवल चार संहिताएं लागू हो जाती हैं, तो नियोक्ताओं की मनमानी को कानूनी मान्यता मिल जाएगी।
ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें
सीपीआई जिला परिषद् के सह सचिव दिनेश ने बताया कि ज्ञापन के माध्यम से निम्नलिखित मांगें राष्ट्रपति तक पहुंचाई गई हैं—
कलेक्टर कार्यालय में सौंपा गया ज्ञापन
सीपीआई जिला परिषद् के सचिव शैलेश के नेतृत्व में दिनेश, लक्ष्मण, बिसंबर, शिवशंकर, महंगू, रामचंद्र, संजीव कुमार, बृजमोहन, नाईक राम, सुखराम सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने मजदूर विरोधी नीतियों को जारी रखा, तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा।
केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया
सीपीआई नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री और श्रम मंत्री लगातार श्रमिकों के कल्याण का दावा करते हैं, लेकिन व्यवहार में औद्योगिक घरानों और कॉरपोरेट सेक्टर को खुश करने के लिए श्रमिकों के अधिकारों की बलि चढ़ा दी गई है। संयुक्त मोर्चे के तहत देशभर में इस हड़ताल को मिल रहे अपार समर्थन से सरकार को सबक लेना चाहिए।
हड़ताल को मिला व्यापक समर्थन
सूत्रों के अनुसार कोण्डागांव जिले के विभिन्न औद्योगिक इकाइयों, निर्माण स्थलों, छोटे प्रतिष्ठानों और वनोपज संग्रहण केंद्रों पर भी आज हड़ताल का असर देखा गया। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने फिलहाल इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
क्या कहते हैं श्रम विशेषज्ञ?
श्रम कानूनों के जानकारों का मानना है कि चार श्रम संहिताओं में काम के घंटे बढ़ाने, बिना सरकारी अनुमति के कर्मचारियों की छंटनी, संघ बनाने की प्रक्रिया को कठोर बनाने और वास्तविक मजदूरी के आंकलन में ढील जैसे प्रावधान हैं, जो सीधे तौर पर मजदूर हितों के खिलाफ हैं।
आगे की रणनीति
सीपीआई नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि केवल ज्ञापन सौंपने भर से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। आने वाले दिनों में धरना-प्रदर्शन, ट्रेड यूनियनों के साथ संयुक्त बैठक और ग्राम स्तर तक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। श्रम संहिताओं को लेकर आदिवासी समाज में भी व्याप्त असंतोष को देखते हुए पार्टी ने इसे क्षेत्र का सबसे बड़ा मुद्दा बनाने का निर्णय लिया है।
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