Ghansyam Sharma / Sun, May 21, 2023 / Post views : 183
कोंडागांव में तेजी से पैर पसार रहा लंपी वायरस, शहीद भगत सिंह वार्ड में लंपी वायरस से ग्रसित एक बछिया की हुई मौत
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
जिला मुख्यालय में मवेशियों में लंपी रोग तेजी से फैलता नजर आ रहा है जिसके चलते मवेशी तड़प तड़प कर मरने को मजबूर है। वही पशु विभाग इस पर लगातार मॉनिटरिंग कर बीमारी से पशुओं को चिन्हित करने की बात कह रही है। 20 मई को शहीद भगत सिंह वार्ड निवासी लीना तिवारी ने बताया कि वार्ड में एक बीमार बछिया एक हफ्ते से मोहल्ले में घूम रही थी जिसके उपचार के लिए वेटनरी हॉस्पिटल में जानकारी दी गई थी। जिसके बाद विभाग ने एक कर्मचारी को भेज कर इंजेक्शन तो लगवा दिया पर बछिया के इलाज के लिए और कोई भी जानकारी नहीं दी गई। वहीं 20 मई की रात उस बछिया की बीमारी के चलते दर्दनाक मौत हो गई है। वही नगर पालिका से मृत पड़े बछिया को उठाने के लिए संपर्क किया गया तो उनके द्वारा भी जेसीबी खराब होने का हवाला दे दिया गया, हालाकि लगातार फोन पर दबाब बनाने के बाद नपा का ट्रेक्टर मृत बछिया को लेने पहुंचा ।
क्या है लंपी वायरस, कैसे करे लक्षण की पहचान
लम्पी स्कीन वायरस एक त्वचा रोग है जिसकी वजह से पशुओं की स्किन में गांठदार या ढेलेदार दाने बन जाते हैं यह वायरस एक पशु से दूसरे पशुओं में फैलता है, लम्पी वायरस एक संक्रमित रोग है जो एक पशु से दुसरे पशु को हो जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि इसका संक्रमण मुख्य रूप से मच्छरों, मक्खियों, तत्तैयो, जूं आदि से फैल सकता है। इसके अलावा पशुओं के सीधे संपर्क में आने से भी फ़ैल सकती है। खासकर साथ खाने / दूषित खाने और पानी के सेवन करने से भी ये बीमारी फ़ैल सकती है।लंपी वायरस एक बहुत ही तेजी से फैलने वाला वायरस है। इस बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए समय पर लक्षणों की पहचान कर उनके आधार पर इलाज शुरू कर देना ही एकमात्र तरीका है। पशुओ को लगातार बुखार रहना वजन कम होना
लार निकलनाआंख और नाक का बहना दूध का कम होना शरीर पर चकत्ता जैसी गांठें बन जाना इसकी मुख्य पहचान है।
लंपी वायरस से बचाव के तरीके
विशेषज्ञों की माने तो इस वायरस से वचाव के लिए अभी तक कोई एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है इस रोग से वचाव के लिए एक मात्र तरीका है, इस रोग से प्रभवित पशुओं को कम से काम 28 दिन के लिए आइसोलेट कर दिया जाये ,लंपी रोग से प्रभावित पशुओं को दूसरे पशुओं से अलग रखें,लंपी वायरस से प्रभावित पशुओं को फिटकरी के पानी से नहलाना चाहिए, रात के समय पशुओं के पास नीम के पत्तों को जलाकर धूवा करें,जहाँ प्रभावित पशु रहता उस पूरे क्षेत्र में कीटाणुनाशक दवाओं का छिड़काव करें
इस वायरस की वजह से पशु की मृत्यु होने पर शव को खुला न छोड़ें ,अगर किसी पशु को यह वायरस हो जाता हैं तो उस पशु को बाकी पशुओ से अलग करदे ताई बाकी पशुओं में यह फेल न सकें। क्योंकि यह बीमारी मक्खी, मच्छर, व ततैया, से भी फेल सकती।है इसलिए अपने पशुओं के रहने की जगह को साफ़ रखे ताकि उनके आसपास यह चीजें न आ सकें।
–जिले में अब तक कोई कार्य योजना नहीं लंपी वायरस से बीमार पशुओं के उपचार को लेकर–
जिला प्रशासन के मॉनिटरिंग की कमी के चलते अब सड़कों पर लंपी वायरस से पशुओं की मौत होती नजर आ रही है अगर यही हालत रही तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में लंपी वायरस से पशुओं की हालत बद से बदतर होगी व वायरस के चलते एक बड़ी पशुधन हानि होगी।
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