Ghansyam Sharma / Fri, Apr 1, 2022 / Post views : 162
नक्सली इलाके में सरपंच, सचिव,अधिकारी व ठेकेदार विकास कार्यो के नाम पर पैसे से हो रहे लाल निर्माण कार्य में सेंध मारीकर
68 लाख रुपये खर्च, नहीं लगा निर्माण सूचना पटल
कोंडागांव पत्रिका लुक।
पूर्व में कलेक्टर जन दर्शन में पहुंचे अतिसंवेदनशील इलाका ग्राम पंचायत कडेनार का ग्रामीण राजमन दिवान कलेक्टर से गुहार लगाकर ठेकेदार से 1 लाख से अधिक की राशि भुगतान दिलाने का आग्रह किया। राजमन दिवान ने बताया कि दो वर्ष से अधिक समय होने के बाद भी ठेकेदार द्वारा भुगतान नहीं किया गया हैं बार बार बोलने पर भी ठेकेदार द्वारा गुमराह किया जा रहा है। कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर को आवेदन दिया और कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा ने पीड़ित मजदूर का व्यथा सुनने के बाद त्वरित कार्यवाही करने का आदेश दिया।
क्या है पूरा मामला
आपको बता दे कि कोंडागांव जिला व नारायणपुर जिला के सरहदीय संवेदनशील इलाका ग्राम पंचायत कडेनार का मामला है इस इलाके को विकास से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है पर नक्सलियों के भय दिखाते हुए विकास नहीं हो रहा है। पूर्व कलेक्टर नीलकण्ठ टेकाम के द्वारा कोंडागांव जिला के विकास के लिए लगातर कोशिश करते हुए अतिसंवेदनशील इलाका ग्राम पंचायत कडेनार में कम्पोजिट
भवन बनाने का निर्णय लिया गया ओर इस पर कार्य को करने के लिए अधिकारियों के द्वारा पोजेकट तैयार करने के लिए कहा गया।
सोच क्या थी ऐसे निर्माण भवन का
पूर्व कलेक्टर नीलकण्ठ टेकाम के द्वारा कम्पोजिट भवन का उद्देश्य बताए थे कि संवेदनशील इलाके बहुत सारे भवन बनाना बड़ा कठिन काम हैं। इनके लिए मैंने सोचा कि एक ही छत के नीचे सभी सुविधा ग्रामीणों को।मिल सके। ऐसी सोच को सच करने के लिए पूर्व कलेक्टर ने कम्पोजिट भवन का निर्माण सुरु किया गया। पूर्व कलेक्टर नीलकंठ टेकाम आगे कहा था कि उस भवन में सभी सभी सुविधाएं हो जैसे पीडीएस गोदाम सह दूकान पंचायत भवन सहित अन्य सरकारी काम काज किया जा सके साथ ही सरकार की योजनाओं का प्रचार प्रसार का किया जा सके।

कितने राशि का आबंटन
68 लाख रुपए के से बनने वाला कम्पोजिट हॉस्टल भवन का निर्मण किया जा रहा था पर पूरी राशि आहरण होने के बाद भी कम्पोजिट भवन निर्माण अधूरा पड़ा है। कुछ जागरूक ग्रामीण का कहना है की आज भी नक्सली इलाके में नक्सलियों का भय दिखाकर ठेकेदार, सरपंच, सचिव व इंजीनियर, एसडीओ सभी ने मिल व कूट रचना करते हुए निर्माण कार्यो का राशि निकाल लिया जाता हैं। पूर्व में भी कई निर्माण कार्य धरातल पर नही बल्कि कागजों में ही सिमट कर विकास दिखा दिया जाता है। आज भी कम्पोजिट भवन का भी अधूरा पड़ा है जबकि 68 लाख रुपये से क्या नही बन सकता था। वही आज कम्पोजिट भवन अपने पूर्ण रूप में आने के लिए इंतजार में हैं। कही ऐसा तो नही की इंतजार में कम्पोजिट भवन खण्डर में तब्दील ना हो जाए।
अधिकारियों के द्वारा स्टीमेट पर भी उठ रहे सवाल
जिले के इंजीनियरों व अधिकारियों के द्वारा ग्राम पंचायत कडेनार में 68 लाख रुपये का कम्पोजिट भवन निर्माण का स्टीमेट तैयार किया गया और राज्य व जिला प्रशासन के द्वारा राशि का आबंटन भी किया गया । उक्त 68 लाख रुपये की पूरी राशि खर्च होने के बाद भी भवन अधूरा । क्या ऐसे में स्टीमेट बनाने वाले अधिकारी या इंजीनियर सन्देह के दायरे में। क्योंकि कोंडागांव जिले नामी गिरामी शासकीय इंजीनियरों व अधिकारियों के द्वारा स्टीमेट 68 लाख का तय होना और उक्त तयनुमा राशि मे भवन अधूरा बनना इंजीनियरों व अधिकारियों की योग्यता पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा होता हैं? 
मजदूर व मटेरिया देने वाले ग्रामीण परेशान
एक ओर 68 लाख रुपए की पूरी राशि आहरण इंजीनियर ठेकेदार सरपंच ,सचिव की मिलीभगत से हो जाना। उक्त भवन निर्माण में ग्रामीण मजदूर व सप्लायर ठेकेदार, सरपंचव सचिव के द्वारा मजदूरी भुगतान नही किये जाने से परेशान हैं ओर ठेकेदार के चक्कर लगाने लगते थक हर कर कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचकर कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा से शिकायत करते हुए बकाया भुगतान दिलाने की मांग की है।
कुछ जागरूक नागरिकों का कहना है कि इंजीनियरिंग ठेकेदार सरपंच ,सचिव की मिलीभगत से ही 68 लाख रुपये से पूर्ण होने वाला भवन आज अधूरा पड़ा है यह एक जिले का नही बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य के।लिए भष्ट्राचार का पुख्ता प्रमाण हैं कोंडागांव जिले के नक्सल क्षेत्र के ग्राम पंचायत कडेनार का। 
जागरूक ग्रामीण व सामाजिक कार्यकर्ता का कहना
संवनशील इलाका में होने वाले विकास कार्यो को लेकर पत्रिका न्यूज़ ने जागरूक ग्रामीण व सामाजिक कार्यकर्ताओं से चर्चा की ओर उनका जवाब सुन कर हम भी हैरान हैं। जागरूक ग्रामीण व सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं कि नक्सली इलाके में सरकार के द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं में जो राशि आती हैं उसका उपयोग विकास के लिए नही बल्कि सरपंच सचिव व अधिकारी अपने हित के ही करते हैं।
नक्सली गढ़ ग्राम पंचायत कडेनार में नक्सलियों का भय दिखाकर सरकार के द्वारा जारी विकास कार्यो व जनहित योजनाओं के करोड़ों रुपये की राशि का बंदरबांट किया जाता रहा हैं
राज्य सरकार या केंद्र सरकार या स्वतंत्र एजेंसज के द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जाए। इस जांच में तो सरपंच, सचिव अधिकारियों व ठेकेदार के द्वारा किए विकास कार्य में खर्च हुई राशि का हकीकत पता चल जाएगा और जांच के उपरांत सरपंच ,सचिव अधिकारी व ठेकेदार सलाखों के पीछे दिखेंगे। समाजिक केकार्यकर्ता ने कहा कि बिल्ली के गले में घण्टी बाँधेगा कौन?
लेखनी बिरज नाग
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