Ghansyam Sharma / Sat, Apr 5, 2025 / Post views : 165
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार-2025 का आयोजन 8 अप्रैल से शुरू हो रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार, यह तिहार तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य है जनसमस्याओं का त्वरित समाधान, जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा और जन संवाद को सशक्त बनाना।
सुशासन तिहार-2025 के उद्देश्य:
आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करना। विकास कार्यों में गति लाने के साथ ही आम जनता, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से सीधा संवाद स्थापित करना।
सुशासन तिहार-2025 के तीन चरण:
पहला चरण (8 अप्रैल से 11 अप्रैल 2025 तक): आम जनता से आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। ग्राम पंचायत मुख्यालयों और नगरीय निकाय कार्यालयों में समाधान पेटी रखी जाएगी।
जिला और विकासखण्ड मुख्यालय स्तर पर भी समाधान पेटी की व्यवस्था की जाएगी। आवश्यकतानुसार हाट बाजारों में भी आवेदन संग्रह किए जाएंगे। ऑनलाइन आवेदन प्राप्त करने की भी व्यवस्था की जाएगी।
दूसरा चरण: लगभग एक माह के भीतर प्राप्त आवेदनों का निराकरण किया जाएगा।
तीसरा चरण (5 मई से 31 मई 2025 के बीच): समाधान शिविरों का आयोजन किया जाएगा।
आवेदनों का निराकरण:
सभी प्राप्त आवेदनों को स्कैन कर सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा और संबंधित अधिकारियों को भेजा जाएगा। संबंधित विभाग/अधिकारी लगभग एक माह में इन आवेदनों का निराकरण सुनिश्चित करेंगे। मांग से संबंधित आवेदनों को बजट की उपलब्धता के आधार पर निराकृत किया जाएगा। इन आवेदनों के निराकरण की गुणवत्ता का विश्लेषण जिला और राज्य स्तर पर किया जाएगा।
समाधान शिविर का आयोजन:
5 मई से 31 मई 2025 के दौरान प्रत्येक 08 से 15 पंचायतों के मध्य समाधान शिविर आयोजित किए जाएंगे।
नगरीय निकायों में भी आवश्यकतानुसार समाधान शिविर आयोजित होंगे। शिविरों के आयोजन की तिथि की जानकारी आवेदकों को एस.एम.एस. के माध्यम से दी जाएगी। इन शिविरों में प्राप्त आवेदनों की प्रविष्टि भी पोर्टल में की जाएगी। जिन आवेदनों का निराकरण शिविर में सम्भव हो, शिविर में किया जाए, शेष आवेदनों का समाधान एक माह में कर आवेदकों को सूचित किया जाएगा। शिविरों में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी और हितग्राहीमूलक योजनाओं के आवेदन पत्र/प्रपत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रत्येक शिविर के लिए एक खंडस्तरीय अधिकारी को प्रभारी बनाया जाएगा। समाधान शिविरों में विकासखंड एवं अनुभाग स्तर के सभी अधिकारी उपस्थित रहेंगे, जिला स्तर से भी कुछ अधिकारी उपस्थित रहेंगे। इसी तरह की व्यवस्था नगरीय निकायों के शिविरों में भी की जाए।
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