Ghansyam Sharma / Fri, Apr 1, 2022 / Post views : 163
कोंडागांव पत्रिका लुक।
नक्सल गढ़ के नाम से जाना जाने वाला जिले का अति संवेदनशील क्षेत्र जहां पहुंचने को लेकर चाहे जनप्रतिनिधि हो या प्रशासनिक अमला सोच में पड़ जाते हैं ऐसे पहुंच विहीन बिहड इलाके में सामाजिक कार्यकर्ता वर्षों से सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुचाने व लोगों में जनजागरूकता लाने का बीड़ा उठा रहा ।
आपको बतादे कि मुलतः राजनांदगांव निवासी प्रकाश बागडे़ का जन्म वर्ष 1975 में हुआ। पिता स्वर्गीय भानुराम बागडे भिलाई स्टील प्लांट में कार्यरत रहे व माता श्रीमती अनुसूईया बागडे गृहणी थी, प्राथमिक शिक्षा दुर्ग से पूरी कर मुक्त विश्वविद्यालय से समाज शास्त्र में स्नातकोत्तर सहित वर्तमान में एमएसडब्ल्यू डिप्लोमा ले रहे है, जिनका आयुर्वेद औषधालय मे अंशकालिक स्वच्छक के पद पर 1996 में नियुक्ति के बाद जब पहली बार मर्दापाल क्षेत्र अंतर्गत नक्सल प्रभावित ग्राम कडेनार पहुंचे ।
माता पिता से मिली है सेवा की भावना
प्रकाश बागड़े ने बताया कि बचपन से ही माता पिता से सेवा की प्रेरणा मिली थी जिसको मैन भी अपने जीवन में गांठ बांध ली कि में भी अपना पूरा जीवन आम लोगों की सेवा में लगा दूंगा ओर जन सेवा को आगे बढाउंगा साथ ही सरकार के द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजना का लाभ उन पहुंच विहिन गांवों में शिक्षा स्वास्थ्य की लचर स्थिति को जिला व राज्य सरकार तक पहुंचाकर निवासरत स्थानीय लोगों की तस्वीर बदलने की ठान सेवा को अपना मिशन बनाया।
जनजागरूकता का चलाया अभियान
प्रकाश ने बताया की आयुर्वेद औषधालय मे अंशकालिक स्वच्छक के पद पर 1996 में नियुक्ति मेरी घोर नक्सल प्रभावित ग्राम कडेनार में हुई थी और उस समय उस इलाके में जाना मौत को दावत देना जैसा था । क्योंकि एक ओर नक्सलियों का भय तो दूसरी ओर जंगली जानवरों का डर। इस इलाके में पहुंचने के लिए कोई वाहन नहीं चलती थी बस साइकल में ही आना जाना होता था। एक बार कडेनार पहुंच जाने के बाद एक महीना वही पर रह कर लोगों की सेवा करता था । फिर कोंडागांव में कुछ दैनिक जरूरत के सामन के साथ ही दवाइया भी ले कर आता था। प्रकाश कहते हैं कि उस दौर में ग्राम में कोई भी सुविधा नही थी साम होते ही अंधेरे में गांव को अपने अघोष में लेता था। उस अंधेर को दूर करने के लिए लालटेन ही जलाते थे । बरसात में गांव शहर से कट ही जाते थे।लगातार उस इलाके में रहकर लोगों की सेवा करते रहा तब जाकर लोगों में अपना विश्वस बना पाया हूं।

पूर्व कलेक्टर नीलकंठ टेकाम से प्रकाश बागड़े द्वारा ग्रामीणों की समस्या को देकर आवेदन व चर्चा
वर्तमान की स्थिति क्षेत्र की
प्रकाश बागड़े बताते हैं कि उस दौर और वर्तमान में जमीन आसमान का फर्क है लोगों में कुछ हद तक जागरूकता तो आई है पर आज भी लोग अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए डरते हैं। कोई अगर कुछ बोल दे या किसी अन्य व्यक्ति से पैसा लेना हो पर वह नही दे रहा तो वह पैसा भूल जाते हैं क्योकि वे विवाद करना नही चाहते।
ग्राम पंचायत विकास कैसा
ग्राम पंचायत की बात कहते हुए बताते हैं कि उस दौर में नक्सली इलाके में विकास के नाम पर ग्राम पंचायतों में आने वाली राशि का ग्राम में विकास नही होता था। वही अगर वर्तमान की बात की जाए तो कुछ हदतक विकास कार्य हो रहे हैं क्योंकि आज भी निवासरत लोग आवाज नहीं उठाते।
विकास कार्यो के नहीं होने की शिकायत
राज्य सरकार के द्वारा विकास कार्यो के लिए दी जाने वाली राशि की शिकायत तो मैने भी जिला प्रशासन से की थी साथ ही मीडिया के लोगों को भी इसकी जानकारी दी और वे लोग भी ग्राम के पहुचकर खबरे प्रकाशित भी की, पर नतीजा सन्तोष जनक नही मिल पाया।
शिकायत करने पर मिल नक्सली सहयोगी का तमगा
प्रकाश बागड़े बताते हैं कि लोगो के हित के लिए राज्य सरकार के द्वारा आने वाली राशि व लोगों में जनजागरूकता लाने फैलाने पर भष्ट लोगों के द्वारा पुलिस से शिकायत करते थे और इनाम के स्वरूप मुझे नक्सली समर्थक दर्जा मिला, पर मैने लोगों की जन सेवा भी भावना लेकर चलता रहा और अपना कार्य करता रहा हूं अधिकारी भी जानते हैं कि बदनाम करने के लिए ऐसी अफवाएं फैलाई जा रही है । मैं अपने निष्ठापूर्वक कार्य कर रहा हूं और करता ही चला जा रहा हूं। 
क्यों करते है बदनाम
प्रकाश ने बताया कि लोग हर व्यक्ति का अधिकार है सरकार की योजनाओं के साथ ही शिक्षा , स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना है । पर कुछ लोग नहीं चाहते कि अंदरूनी इलाके में लोग सरकार योजनाओं व शिक्षा के प्रति जागरूक ना हो। क्योंकि लोग जागरूक हो जाएंगे तो वे अपने हक के लिए खड़े हो जाएंगे इसलिए कुछ लोग मुझे बदनाम करते के लिए बहुत सारी अफवाह फैला देते हैं । पर मुझे अपना कार्य करना है जो में करता हु रहूंगा।
एक नजर में
आपको बतादे की धुर नक्सल प्रभावित गांवों के शासकीय योजनाओं का प्रचार प्रसार के साथ ही ऐसे बच्चे जो प्राथमिक शिक्षा के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ चुके थे, उन्हें ओपन स्कूल के सहारे बच्चों का भविष्य गढने में लगा है समाजसेवी प्रकाश बागडे। गांव की समस्याओं को लेकर प्रशासन से पत्राचार करने लगे। उसी बीच उन्होंने देखा गांव के वे बच्चे जो गांव के स्कूलों से प्राथमिक शिक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आस-पास के गांवों में स्कूल व हॉस्टल सुविधा न होने सहित अशिक्षा गरीबी की वजह से पढ़ाई छोड़ चुके थे । उनमें से कुछ बच्चे नक्सल पीड़ित परिवारों से भी है। ऐसे बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया , बच्चों को ओपन स्कूलों के माध्यम से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करने प्रेरित करने लगे। बच्चों को शिक्षित करने का जुनून ऐसा अपनी शादी तक ना कर अपने अल्प मानदेय की राशि से आपात स्थिति के लिए कुछ राशि बचाकर कमजोर तबकों के कुछ बच्चों के लिए ओपन स्कूल का फार्म भरना 
पुस्तके सहित, बच्चों के रहने की व्यवस्था तक कर रहे।ताकि अंदरूनी गांव के बच्चे भी शिक्षित होकर अपना बेहतर भविष्य सुनिश्चित कर विकास विहिन क्षेत्र के विकास में अपना योगदान दे सकें। मुक्त विद्यालय से मर्दापाल क्षेत्र के लगभग 120 से अधिक बच्चे 10वीं 12वीं सहित स्नातक स्नातकोत्तर कंप्यूटर की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं । वर्तमान में कोई शासकीय सेवा में तो कोई जनप्रतिनिधि के रूप में कार्यरत है।
श्रीमती रजबति बघेल पति गंनसी बघेल आठवीं उत्तीर्ण थी, मुक्त विश्वविद्यालय से बायो में बीएससी व समाज शास्त्र में एमए कर रही, वर्तमान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर कार्यरत है।
जमधर कश्यप मुक्त विश्वविद्यालय से कॉलेज की पढ़ाई व आईटीआई पुरी कर चुका है।जो रोजगार सहायक के रूप में कार्य कर चुका।
शंकर वट्टी जो आठवीं उत्तीर्ण कर पढ़ाई छोड़ चुका था। प्रेरित करने की बात मुक्त विद्यालय से दसवीं उत्तीर्ण कर वर्तमान में कडेनार का सरपंच है।
रमेश पाटिल ,समन्वयक पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय कोंडागांव।
- प्रकाश बागडे अंदरुनी क्षेत्र के बच्चों को लाकर फॉर्म भरवातें हैं, बीए ,बीएससी, एम ए, एम एस सी ,एमएसडब्ल्यू ,पीजीडीसीए ,डीसीए आदि लगभग 250 से अधिक लोगों का करवाया है।
लेखनी पी.डी.एम.
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