Ghansyam Sharma / Mon, Jan 19, 2026 / Post views : 256
फरसगांव। पत्रिका लुक
एसटी, एससी एवं ओबीसी मूल निवासी समाज, कोंडागांव जिला द्वारा दिनांक 18 जनवरी 2026 को फरसगांव रेस्ट हाउस में जिले के समस्त समाज प्रमुखों की उपस्थिति में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित
की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन की कार्यकारिणी की समीक्षा, नवीन जिला अध्यक्ष का चुनाव एवं आगामी सामाजिक-संगठनात्मक रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना रहा।
बैठक की शुरुआत में वर्तमान जिला अध्यक्ष फरसूराम सलाम द्वारा अपने तीन वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने की जानकारी दी गई, जिसके पश्चात उन्होंने नियमों के अनुरूप समस्त जिला कार्यकारिणी को भंग करने की घोषणा की। इसके बाद नए सिरे से जिले के पदाधिकारियों के मनोनयन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई, जिसमें सभी समाजों के जिला प्रमुखों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
जिला अध्यक्ष पद हेतु साहू समाज के जिला अध्यक्ष राजेश साहू द्वारा परशुराम सलाम का नाम प्रस्तावित किया गया। प्रस्ताव का समर्थन बैठक में उपस्थित सभी समाजों के जिला प्रमुखों द्वारा सर्वसम्मति से किया गया, जिसके फलस्वरूप परशुराम सलाम को पुनः जिला अध्यक्ष चुना गया। इसी प्रकार अन्य पदों पर भी समाज प्रमुखों के प्रस्ताव के आधार पर विधिवत एवं सर्वसम्मति से पदाधिकारियों का मनोनयन किया गया।
पदाधिकारियों के चयन उपरांत शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। शपथ ग्रहण के बाद बैठक में बस्तर संभाग के बेरोजगार युवक-युवतियों की समस्याओं पर गंभीर चर्चा की गई। समाज की ओर से यह प्रमुख मांग रखी गई कि तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के सभी पदों पर स्थानीय मूल निवासियों की ही भर्ती की जाए। वक्ताओं ने कहा कि पूर्व में शासन द्वारा निकाली गई भर्तियों में बस्तर संभाग के बाहर के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता मिलने से स्थानीय बेरोजगार युवक-युवतियां वंचित रह गए।
बैठक में यह भी कहा गया कि बस्तर के शिक्षा संसाधनों एवं परिवेश के कारण यहां के छात्र-छात्राएं अन्य संभागों की तुलना में अपेक्षाकृत कम प्रतिशत अंक ला पाते हैं, जिससे वे प्रतियोगी परीक्षाओं में पिछड़ जाते हैं। ऐसे में स्थानीय युवाओं के हित में विशेष नीति बनाकर उन्हें सरकारी नौकरियों में अवसर प्रदान किया जाना आवश्यक है। समाज ने निर्णय लिया कि इस मांग को लेकर शासन के समक्ष संगठित रूप से ज्ञापन व आंदोलनात्मक पहल की जाएगी।
इसके अतिरिक्त बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मत्तांतरित हुए मूल निवासियों की घर वापसी के लिए एक सघन सामाजिक अभियान चलाया जाएगा। वहीं, ग्राम स्तर पर स्थानीय विवादों के त्वरित समाधान हेतु न्याय समिति का गठन किया जाएगा, ताकि छोटे-मोटे प्रकरणों का निराकरण गांव में ही आपसी सहमति से किया जा सके।
बैठक में बस्तर की समृद्ध संस्कृति, सांस्कृतिक धरोहरों एवं हरे-भरे जंगलों के संरक्षण को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। समाज ने संकल्प लिया कि मूल निवासी समाज बस्तर की पहचान, परंपराओं एवं प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि शासन द्वारा मूल निवासी समाज के हितों के प्रति सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज को पृथक बस्तर राज्य की मांग को लेकर अभियान चलाने के लिए विवश होना पड़ेगा। वक्ताओं ने बताया कि पृथक बस्तर की मांग पूर्व में भी विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई जाती रही है।
बैठक में जिले के पांचों विकासखंडों से प्रमुख पदों पर पदाधिकारियों का गठन सर्वसम्मति से किया गया। मनोनयन के पश्चात सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों का तिलक-चंदन लगाकर एवं पुष्पहार पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत-सम्मान किया गया। बैठक का समापन समाज की एकजुटता, अधिकारों की रक्षा एवं बस्तर के सर्वांगीण विकास के संकल्प के साथ किया गया।
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