Ghansyam Sharma / Tue, Oct 6, 2026 / Post views : 74
कोण्डागांव । पत्रिका लुक
दक्षिण वनमंडल कोण्डागांव के अंतर्गत कोण्डागांव वन परिक्षेत्र के ग्राम पंचायत कुसमा डेम के पास वन विभाग द्वारा कराए गए पौधरोपण कार्य की स्थिति अब सवालों के घेरे में है। पौधरोपण के बाद यहां लगाए गए कई पौधे धीरे-धीरे गायब होने लगे हैं। मौके पर कई जगह पौधों के स्थान पर केवल ठूंठ दिखाई दे रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार पौधे लगाने के बाद समय पर सुरक्षा के लिए जाली या घेरा नहीं लगाया गया। खुले में पौधे रहने के कारण मवेशियों और अन्य जानवरों द्वारा उन्हें चरने से नुकसान पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पौधों की सुरक्षा के लिए समय रहते व्यवस्था की जाती तो बड़ी संख्या में पौधों को बचाया जा सकता था।
कितने पौधे, कौन सी प्रजाति, खर्च कितना?
पौधरोपण स्थल पर विभाग की ओर से सूचना पटल तक नहीं लगाया गया है। ऐसे में आम लोगों को यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि कुल कितने पौधे लगाए गए, कौन-कौन सी प्रजातियों के पौधे लगाए गए और पौधरोपण पर कितनी राशि खर्च की गई।
वहीं वर्तमान में पौधरोपण स्थल पर कुछ पोल लगाने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन पौधों की सुरक्षा के लिए जाली लगाए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। सवाल यह है कि यदि सुरक्षा घेरा लगाया जाना था तो पौधरोपण के तत्काल बाद इसकी व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
निगरानी पर बड़ा सवाल
पौधरोपण के बाद पौधों की सुरक्षा और नियमित देखरेख वन विभाग की जिम्मेदारी है। बावजूद इसके पौधों के नष्ट होने की स्थिति विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े करती है। सिर्फ पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखकर जीवित रखना भी विभाग की जिम्मेदारी है।
अब देखना होगा कि विभाग मौके की वास्तविक स्थिति का आकलन कर नष्ट हुए पौधों की संख्या तय करता है और जिम्मेदारी निर्धारित करता है या मामला कागजों तक ही सीमित रह जाता है।
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