Ghansyam Sharma / Tue, Jan 20, 2026 / Post views : 330
250 बोरी चावल गायब, बाज़ार से भरपाई का खेल — अफसरों ने कलेक्टर का नाम लेकर साधी चुप्पी
कोंडागांव। पत्रिका लुक
जिले में नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के वेयरहाउस में चल रहे कथित चावल हेराफेरी के खेल का एक और गंभीर मामला सामने आया है। खुटडोबरा स्थित वेयरहाउस में शुक्रवार को हुए लॉट मिलान ने पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जांच में लगभग 250 बोरी चावल की कमी पाए जाने के बाद विभागीय स्तर पर मामले को दबाने की कोशिशें तेज हो गईं।
मुख्यालय के निर्देश पर नोडल अधिकारी बलवंत साहू जब खुटडोबरा गोदाम पहुंचे, तो लॉट मिलान के दौरान चावल का स्टॉक कागजों से मेल नहीं खा पाया। जैसे ही शॉर्टेज सामने आया, वैसे ही भरपाई का खेल शुरू कर दिया गया—ताकि मामला ऊपर तक न पहुंचे और जिम्मेदारी तय न हो।
बाजार से चावल, बिना तौल-पर्ची और लॉट नंबर के स्टैकिंग
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, चावल की कमी उजागर होने के बाद शाखा के कर्मचारी महेश जोशी द्वारा कथित तौर पर बाजार से चावल मंगवाकर खुटडोबरा गोदाम क्रमांक 17 में स्टैकिंग कराई गई। हैरानी की बात यह है कि—
चावल का वजन नहीं कराया गया,
काटा पर्ची नहीं बनाई गई,
और बोरियों पर लॉट पर्ची तक नहीं लगाई गई।
यानी पूरी प्रक्रिया नियमों को ताक पर रखकर सिर्फ कागजी मिलान के लिए की गई, ताकि लॉट मिलान “क्लियर” दिखाया जा सके।
गोदाम प्रभारी ने मानी कमी, पर जिम्मेदारी से पल्ला
जब पत्रकारों ने वेयरहाउस के गोदाम प्रभारी हेमंत कुमार राज से सवाल किए, तो उन्होंने कलेक्टर की लिखित अनुमति का हवाला देकर अधिकृत बयान देने से इनकार कर दिया।
हालांकि बातचीत में उन्होंने यह स्वीकार किया कि—
“लॉट मिलान में 250 बोरी चावल की कमी आई थी और उसका समायोजन किया गया।
लेकिन चावल कहां से आया, किसके आदेश पर आया, और बिना तौल-पर्ची व लॉट नंबर के स्टैकिंग कैसे कर दी गई—इन सवालों पर उन्होंने अनभिज्ञता जताकर जिम्मेदारी से हाथ झाड़ लिए।
जिला प्रबंधक पूरी तरह मौन
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब नान की जिला प्रबंधक अंजना एक्का से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा। यह चुप्पी खुद में कई सवाल खड़े करती है।
पुराने नाम, पुराने आरोप
गौरतलब है कि नोडल अधिकारी बलवंत साहू पूर्व में भी लंबे समय तक जिले में गोदाम प्रभारी के पद पर पदस्थ रह चुके हैं। उनके कार्यकाल में भी चावल अनियमितता के मामले सामने आए थे, जिनमें एक प्रकरण में तीन विभागीय कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई थी। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि—
क्या वही पुराना तरीका, वही पुरानी चूकें, फिर दोहराई जा रही हैं?
कलेक्टर ने दिए जांच के संकेत
मामले की जानकारी मिलने पर कलेक्टर कोंडागांव श्रीमती नूपुर राशि पन्ना ने कहा—
“यह मामला मेरे संज्ञान में लाया गया है, इसकी जांच करवाई जाएगी।”
सबसे बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
250 बोरी चावल गायब कैसे हुआ?
बाजार से चावल लाकर भरपाई किसके आदेश पर की गई?
बिना तौल-पर्ची और लॉट नंबर के स्टैकिंग पर किसकी जिम्मेदारी तय होगी?
और क्या जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी, या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होगी?
जनता के राशन से जुड़ा यह मामला सिर्फ अनियमितता नहीं, बल्कि सीधे-सीधे भरोसे से खिलवाड़ है।
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