Ghansyam Sharma / Thu, Jan 29, 2026 / Post views : 252
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
अमृत मिशन 2.0 के तहत कोंडागांव नगर में चल रहे कार्य अब आम जनता के लिए खतरा बन चुके हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन हालातों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? ठेकेदारों की लापरवाही तो सामने है, पर उससे भी गंभीर भूमिका नगर पालिका और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की मानी जा रही है।
नगर में एक ओर सड़कों पर खुले गड्ढे जानलेवा बने हुए हैं, वहीं दूसरी ओर उड़ती धूल से लोगों का चलना मुश्किल हो गया है। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और दोपहिया वाहन चालक हर दिन जोखिम उठाने को मजबूर हैं। इसके बावजूद नगर पालिका और संबंधित विभागों द्वारा न तो ठेकेदारों पर कार्रवाई की जा रही है और न ही सुरक्षा मानकों का पालन कराया जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अमृत मिशन 2.0 के कार्यों की निगरानी करने वाले अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। ठेकेदारों द्वारा बिना बैरिकेडिंग, बिना संकेतक और बिना सड़क मरम्मत के काम अधूरा छोड़ दिया जाता है, लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई नोटिस, जुर्माना या कार्यवाही दिखाई नहीं देती।
हाल ही में बच्चों से भरी स्कूल बस का गड्ढे में धंस जाना इस लापरवाही का प्रत्यक्ष उदाहरण है। यदि इस घटना में कोई अनहोनी हो जाती, तो उसकी जिम्मेदारी ठेकेदार की होती या फिर उन अधिकारियों की, जिनकी निगरानी में यह कार्य कराया जा रहा है—यह प्रश्न अब नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
नागरिकों का कहना है कि ठेकेदार तो तभी लापरवाह होता है, जब उसे प्रशासन का संरक्षण मिलता है। यदि समय पर निरीक्षण, सख्त निर्देश और दंडात्मक कार्रवाई होती, तो ऐसे हालात पैदा ही नहीं होते।
नगरवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अमृत मिशन 2.0 के कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और लापरवाह ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए। साथ ही जब तक सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित न हो, तब तक ऐसे कार्यों पर रोक लगाने की भी मांग की जा रही है।
यदि प्रशासन ने अब भी आंखें मूंदे रखीं, तो आने वाले समय में किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी से बच पाना मुश्किल होगा।
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