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: नई उड़ान, नया क्षितिज - छत्तीसगढ़ में महतारियों के सशक्तिकरण की कहानी..

Ghansyam Sharma / Mon, Nov 3, 2025 / Post views : 183

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रायपुर । पत्रिका लुक

छत्तीसगढ़ अपने विकास-यात्रा के स्वर्णिम पड़ाव पर है। इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण आधार बनी हैं - राज्य की महिलाएँ, जिन्हें स्नेह व सम्मान से “महतारी” कहा जाता है।
बीते वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण को केवल नीतिगत प्राथमिकता नहीं बनाया, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की धुरी के रूप में स्थापित किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आज महिलाएँ योजनाओं की लाभार्थी मात्र नहीं, परिवर्तन की वाहक बनकर उभरी हैं। राज्य में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए सरकार ने विविध योजनाएँ शुरू की हैं।
सबसे उल्लेखनीय महतारी वंदन योजना है, जिसके तहत लगभग 70 लाख महिलाओं को अब तक 12,983 करोड़ रुपए की राशि वितरित की गई है। यह सहायता महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि परिवार व समाज में निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता भी प्रदान करती है।
दीदी ई-रिक्शा योजना ने 12,000 महिलाओं को रोजगार के नए अवसर दिए। सक्षम योजना के तहत 32,000 महिलाओं को 3 प्रतिशत ब्याज पर 2 लाख रुपए तक व्यवसायिक ऋण दिया गया, जबकि महतारी शक्ति ऋण ने 50,000 महिलाओं को बिना जमानत ऋण प्रदान कर आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त किया। मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना से 1.15 लाख महिलाएँ घर-परिवार के साथ उत्पादन कार्य से जुड़कर सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं।कोंडागांव की रतो बाई का जीवन कभी नक्सली भय से घिरा था। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से उन्हें 1.20 रुपए लाख और मनरेगा से 90 दिन का रोजगार मिला। आज वे पक्के घर में सुरक्षित जीवन जीती हैं और सब्ज़ी विक्रय के माध्यम से जीवन यापन करती हैं। उज्ज्वला, नल-जल जैसी सुविधाएँ उनके जीवन में प्रकाश भर रही हैं। दंतेवाड़ा जिले की गंगादेवी SHG की महिलाएँ आज टाटा मैजिक वाहन का संचालन कर 26,000 रुपए मासिक आय अर्जित कर रही हैं। यह उदाहरण बताता है कि ग्रामीण महिलाएँ अवसर मिलने पर कैसे नए व्यवसायों का संचालन कर सकती हैं।
सरगुजा की श्रीमती श्यामा सिंह ने बिहान योजना के तहत 95,000 रुपए की सहायता से 30 सेंट्रिंग प्लेट से काम शुरू किया। आज उनके पास 152 प्लेट हैं तथा वे 50,000 रुपए प्रतिमाह कमाती हैं। कोरबा की श्रीमती मंझनीन बाई को DMF फंड से स्वास्थ्य केंद्र में नियुक्त होकर उन्हें 9,000 रुपए मासिक मानदेय मिलता है। यह न सिर्फ आर्थिक स्थिरता, बल्कि सामाजिक सम्मान भी देता है।
कभी नक्सली हिंसा से भयभीत बस्तर आज नए परिदृश्य के साथ उभर रहा है। यह इलाका आत्मनिर्भरता, सम्मान और अवसरों की नई पहचान बन गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय कहते हैं कि “बस्तर का पुनर्निर्माण केवल सड़क या पुल बनाना नहीं, यह वहाँ के हर घर में विश्वास का दीप जलाने का संकल्प है।”
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 15,000 विशेष आवास स्वीकृत किए, जिनमें से 3,000 बस्तर, सुकमा, कांकेर, बीजापुर और दंतेवाड़ा में बन रहे हैं। अब तक 12,000 से अधिक लोग सुरक्षित आवास पा चुके हैं। छत्तीसगढ़ में महिला SHG की संख्या 2,80,362 है, जिनमें से लगभग 60,000 समूह बस्तर में सक्रिय हैं। वनोपज और हस्तशिल्प आधारित उद्यमों से करोड़ों का कारोबार हो रहा है। “लखपति महिला मिशन” के अंतर्गत 2,000 महिलाएँ सालाना 1 लाख रुपए से अधिक कमाती हैं। ‘जशप्योर’ और बस्तर बेंत उत्पाद राष्ट्रीय पहचान पा चुके हैं। महिलाएँ अब रोजगार पाने तक सीमित नहीं, बल्कि रोजगार-दाता भी बन रही हैं।
स्वास्थ्य और सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार की उज्ज्वला योजना के अंतर्गत स्वीकृत 25 लाख नए  LPG कनेक्शन में से 1.59 लाख कनेक्शन छत्तीसगढ़ को मिले, जिससे नियद नेल्लानार ग्रामों की महिलाएं भी लाभान्वित हो रही है। मुख्यमंत्री श्री साय कहते हैं -“स्वच्छ रसोई, स्वस्थ परिवार और सशक्त महिला - यही उज्ज्वला का सार है।
छत्तीसगढ़ के 27 जिलों में सखी वन-स्टॉप सेंटर स्थापित हैं, महिला हेल्पलाइन - 181, डायल - 112, 24’7 कार्यरत हैं। नवाबिहान योजना से कानूनी व परामर्श सहायता दी जा रही है। शुचिता योजना से 3 लाख किशोरियाँ लाभान्वित हो रही हैं। 2,000 स्कूलों में नैपकिन वेंडिंग मशीन लगाई गई है। इन पहलों ने महिलाओं के मन में सुरक्षा और आत्मविश्वास की नई ऊर्जा भरी है।
योजनाएँ महिलाओं को तकनीक-आधारित सशक्तिकरण की ओर ले जा रही हैं। ड्रोन दीदी योजना से महिलाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जशप्योर ब्रांड से लगभग 500 महिलाएँ, 10,000 रुपए प्रति माह कमा रही हैं। नवा रायपुर के यूनिटी मॉल में SHG उत्पादों को प्राथमिकता दी जा रही है। ये नारी शक्ति को स्थानीय से राष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँचाने का मार्ग तैयार कर रही हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री
श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े कहती हैं कि “नया छत्तीसगढ़ वह होगा जहाँ भय नहीं, विश्वास होगा, जहाँ महिलाएँ आश्रित नहीं, सशक्त होंगी। ”आज छत्तीसगढ़ का हर गाँव, हर घर, हर परिवार में बदलाव की अग्नि प्रज्वलित है। जहाँ पहले भय था - वहाँ आज आत्मनिर्भरता है। जहाँ मजबूरी थी- वहाँ आज सम्मान है। छत्तीसगढ़ की महतारियाँ अब परिवर्तन की राह नहीं देख रहीं- वे स्वयं परिवर्तन की दिशा रच रही हैं।

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