Ghansyam Sharma / Sat, May 3, 2025 / Post views : 161
सरगुजा । पत्रिका लुक
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और छोटे एवं सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से सरगुजा प्रशासन ने बकरी पालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नवाचार की शुरुआत की है। इस पहल के तहत अब जिले में अफ्रीकन नस्ल 'बोयर' के बकरा-बकरी नजर आएंगे, जो स्थानीय नस्ल की तुलना में तीन से चार गुना अधिक वजनदार होते हैं। इससे ग्रामीणों को अतिरिक्त आर्थिक आय का नया माध्यम उपलब्ध होगा।
बकरी पालन को छोटे किसानों का ‘एटीएम’ माना जाता है क्योंकि इसे पालना आसान होता है और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत नकद आय प्राप्त की जा सकती है। जहां स्थानीय नस्लों का अधिकतम वजन 20 से 25 किलो तक होता है, वहीं अफ्रीकन बोयर नस्ल का वजन 80 से 100 किलो तक होता है, जिससे पशुपालकों को सीधे लाभ मिलेगा।
नवाचार के तहत कृत्रिम गर्भाधान का उपयोग
कलेक्टर सरगुजा के निर्देश पर पशुपालन विभाग ने पहली बार अफ्रीकन बोयर नस्ल का सीमेन मंगवाया है। 7800 सीमेन डोज में जमुनापारी, सिरोही, बारबरी के साथ अफ्रीकन बोयर नस्ल शामिल हैं। ये सीमेन उत्तराखंड लाइव स्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड, ऋषिकेश से प्राप्त हुए हैं। इस योजना में जिला पशु रोगी कल्याण समिति द्वारा भी आर्थिक सहयोग दिया गया है।
वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. सी.के. मिश्रा ने बताया कि अफ्रीकन बोयर नस्ल सफेद रंग की होती है, जबकि गर्दन और सिंग तक का भाग कत्थई रंग का होता है। इसकी भारी कद-काठी इसे अधिक मांस उत्पादन में सक्षम बनाती है, जिससे आय में गुणात्मक वृद्धि संभव है।
सफलता के बाद जिले के हर विकासखंड में विस्तार
छत्तीसगढ़ राज्य में सबसे पहले सूरजपुर और सरगुजा जिले में बकरियों के कृत्रिम गर्भाधान की शुरुआत हुई थी। अब इस नवाचार की सफलता के बाद इसे सरगुजा के हर ब्लॉक में लागू किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को उन्नत नस्लें पालने और उनसे अधिक लाभ प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते किसान
प्रशासन और पशुपालन विभाग के संयुक्त प्रयास से अब बकरी पालन सिर्फ जीविकोपार्जन का साधन नहीं, बल्कि समृद्धि का स्रोत बनता जा रहा है। यह पहल न केवल आय बढ़ाएगी, बल्कि किसानों को आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर भी अग्रसर करेगी।
सोत्र-dprcg
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