Ghansyam Sharma / Thu, Oct 16, 2025 / Post views : 178
रायपुर । पत्रिका लुक (भावेश जैन)
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उत्तर बस्तर और अबूझमाड़ का नक्सलमुक्त होना इस बात का प्रमाण है कि बस्तर अब भय नहीं, बल्कि विश्वास और विकास की नई पहचान बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत नक्सलवाद के अंत की दहलीज पर खड़ा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बीते दो दिनों में 258 नक्सलियों के आत्मसमर्पण ने यह सिद्ध किया है कि बंदूक नहीं, विश्वास की शक्ति जीत रही है। बीते 22 महीनों में छत्तीसगढ़ में 477 नक्सली मारे गए, 2110 ने आत्मसमर्पण किया और 1785 गिरफ्तार हुए हैं। यह आंकड़े राज्य को नक्सलमुक्त बनाने के संकल्प के साक्षी हैं।
साय ने कहा कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाना लक्ष्य है। यह सफलता “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” और “नियद नेल्ला नार योजना” का परिणाम है। सरकार की संवेदनशील नीतियों, 64 नए सुरक्षा शिविरों की स्थापना और बस्तर में शासन के प्रति बढ़ते विश्वास ने इस बदलाव को संभव बनाया है। उन्होंने वीर सुरक्षाबलों के अदम्य साहस और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि उनके समर्पण से बस्तर भयमुक्त हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर नक्सल आतंक से पूरी तरह मुक्त हैं, जबकि दक्षिण बस्तर में यह लड़ाई निर्णायक दौर में है। उन्होंने नक्सलियों से अपील की — “हिंसा की राह अंतहीन पीड़ा देती है, जबकि आत्मसमर्पण जीवन को नई दिशा देता है। अपने परिवारों और मातृभूमि के भविष्य के लिए हथियार छोड़कर विकास की राह चुनें।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर जैसे क्षेत्र अब पूरी तरह नक्सलमुक्त घोषित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की ऐतिहासिक सफलता है। दो दिनों में 258 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि अब बंदूक नहीं, संविधान पर विश्वास की शक्ति जीत रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है।
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