Ghansyam Sharma / Thu, May 15, 2025 / Post views : 180
कोण्डागांव। पत्रिका लुक
कोंडागांव जिले के माकड़ी विकासखंड के ग्राम रांधना में आयोजित सुशासन तिहार एक बार फिर चर्चा में है—लेकिन इस बार सुशासन की वजह से नहीं, बल्कि स्टॉल पर सोते हुए पकड़े गए जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की वजह से।
एक ओर मंच पर मंत्रीगण और विधायक लता उसेंडी जनता को संबोधित कर रहे थे, सुशासन की बातें हो रही थीं, समाधान शिविरों में समस्याओं के निराकरण का दावा किया जा रहा था, और ठीक उसी वक्त नीचे स्टॉल में विराजमान जिले के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी आंखें बंद किए झपकी ले रहे थे।
विडंबना देखिए कि यह सब उस कार्यक्रम में हुआ जिसे “जनता की सुनवाई और समाधान” के लिए आयोजित किया गया था। अब जनता पूछ रही है – जो अधिकारी स्टॉल पर जनता की आँखों के सामने सो रहे हैं, वे दफ्तर में क्या करते होंगे?
सवाल सिर्फ नींद का नहीं है
कुछ लोग कह सकते हैं, "अरे भाई, थक गए होंगे! अधिकारी भी इंसान हैं।" बिल्कुल, परंतु स्टॉल पर, सार्वजनिक रूप से, मंत्री और विधायक का भाषण देने के दौरान इस तरह की लापरवाही केवल थकान नहीं, जिम्मेदारी के प्रति लापरवाही भी दर्शाती है।
सुशासन का अर्थ है सतर्क प्रशासन, जवाबदेही और सक्रिय भागीदारी। लेकिन जब सबसे वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी अपने स्टॉल पर नींद के आगोश में हों, तो जनता को यह विश्वास कैसे दिलाया जाए कि स्वास्थ्य विभाग 24x7 उनकी सेवा में तत्पर है?
नेताओं की प्रतिक्रिया: 'दिखवाता हूं'
जब प्रभारी मंत्री लखन लाल देवांगन से इस नींद के दृश्य के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी – "दिखवाता हूं।" यह कथन चाहे अस्थायी हो या औपचारिक, लेकिन यह प्रशासनिक लापरवाही पर ढिलाई का संकेत तो देता ही है।
लोग पूछ रहे
लोग पूछ रहे हैं – "क्या स्टाल पर नींद लेना अब छत्तीसगढ़ के सुशासन की नई पहचान बन गया है?" क्या अब ऐसे ही नींद में ही अधिकारी जनता का ख्याल रखा रखेगी ? ये सुशासन नहीं अधिकारी का निद्रासन है।
क्या होनी चाहिए कार्रवाई?
इस घटना पर एक उदाहरणीय कार्रवाई की आवश्यकता है। यह केवल एक व्यक्ति की लापरवाही नहीं, बल्कि समूचे सरकारी सिस्टम की प्रतिबिंब है जो जनता के विश्वास पर टिका है। यदि ऐसे अधिकारियों को केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता है, तो यह संदेश जाएगा कि लापरवाही माफ है, बस कैमरे से बचना चाहिए।
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